मूकनायक/रिपोर्टर, राजेश कुमार/बस्ती/उत्तर प्रदेश
गौर थाना क्षेत्र के शिवाघाट–पैकोलिया मार्ग स्थित मेडिकल सेंटर पर गंभीर सवाल संचालक के बयानों में विरोधाभास; डिग्री और लाइसेंस दिखाने से किया इनकार।
बस्ती। जनपद बस्ती के गौर थाना क्षेत्र अंतर्गत शिवाघाट – पैकोलिया मार्ग पर गौर ब्रिज के नीचे संचालित एक मेडिकल सेंटर गंभीर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि यहां बिना वैध योग्यता और आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से दिखाए मरीजों का इलाज एवं भर्ती कर दवा दी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मेडिकल सेंटर के संचालक राजेश कुमार खुद को डॉक्टर बताते हैं। जब डिग्री एवं लाइसेंस के संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने पहले दावा किया कि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज हैं और मेडिकल सेंटर विधिवत पंजीकृत है। बाद में उन्होंने कहा कि डिग्री उनके पुत्र आशुतोष कुमार के नाम पर है, जबकि मेडिकल सेंटर का संचालन वह स्वयं करते हैं।
इसके बाद आशुतोष कुमार को बुलाया गया। उनसे डिग्री और लाइसेंस दिखाने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने पहले कहा कि उनके पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन बाद में उन्हें मौके पर प्रस्तुत नहीं कर सके और कहा कि बाद में उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी डिग्री आयुर्वेद से संबंधित है। आरोप है कि इसके बावजूद मेडिकल सेंटर में बड़े पैमाने पर एलोपैथिक (अंग्रेजी) दवाओं का उपयोग और उपचार किया जा रहा है।
पूछताछ के दौरान डॉ. राजेश कुमार के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया। उन्होंने पहले कहा कि उनके पिता स्वास्थ्य विभाग में बाबू थे, जबकि बाद में बताया कि वे स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता का 13 वर्ष पूर्व निधन हो चुका है और वर्तमान में मेडिकल सेंटर का संचालन वही कर रहे हैं।
मौके पर बातचीत के दौरान डॉ. राजेश कुमार ने कथित रूप से यह भी कहा कि, “ऐसे पत्रकार आते-जाते रहते हैं, आपको जो करना हो कर लीजिए। मैं 32 वर्षों से मेडिकल चला रहा हूं, आज तक कोई कुछ नहीं कर पाया।”
यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला न केवल स्वास्थ्य विभाग के नियमों की अनदेखी का है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़े करता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य विभाग, औषधि निरीक्षक तथा संबंधित सक्षम अधिकारी मेडिकल सेंटर के पंजीकरण, संचालक की योग्यता, डिग्री, लाइसेंस तथा उपचार संबंधी सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मेडिकल सेंटर में अनियमितताएं हैं, तो आखिर 32 वर्षों से यह संचालन किसके संरक्षण में होता रहा? और यदि सभी दस्तावेज वैध हैं, तो उन्हें सार्वजनिक जांच के दौरान प्रस्तुत करने में हिचकिचाहट क्यों दिखाई गई? इन सवालों का जवाब अब स्वास्थ्य विभाग की जांच और कार्रवाई से ही सामने आएगा।

