Thursday, July 16, 2026
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किशोरों ने किया अनूठा प्रयास : मियावाकी कार्निवल से ऑटिज्म जागरूकता और समावेशिता का संदेश

इंदौर

विगत रविवार को इंदौर के बी जौन बिजनेस पार्क में किशोरों द्वारा अनोखा ‘मियावाकी कार्निवल’ आयोजित किया गया। आज के समय ऑटिज्म बीमारी प्रति 60 में से एक बच्चे को है। जिसे माता पिता प्रारम्भ में अनदेखा कर देते हैं। यह बात स्पीच थेरेपिस्ट डॉ. गरिमा दीक्षित ने अपने मुख्य वक्तव्य में बताते हुए कहा कि इसके लिए प्रारम्भ में ही जागरूकता अवश्यक है। डॉ. अनुष्का जैन-ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट ने कहा कि समाज में दो तरह के लोग होते हैं, एक वे जो ऑटिज्म को अपनाते हैं और दूसरे वे जो रूढिवादी सोच के कारण इनको अपने बच्चों के साथ धुलने-मिलने नहीं देते। हमें इस दूरी को प्रारम्भ से मिटाना है। कार्यक्रम की निर्देशिका नेहा कनोडिया ने कार्निवल की भूमिका प्रस्तुत की। तारिणी कस्बेकर ने बताया कि कार्निवल का नाम मियावाकी विधि पर रखा गया है। इस विधि में पौधे साथ-साथ बोए जाते हैं और साथ-साथ बढ़ते हैं। उसी सिद्धांत पर बच्चों ने संदेश दिया कि हम भी सब एक साथ मिलकर बढ़ना चाहते हैं। हमें जाति, नस्ल, आर्थिक स्थिति, समाज या ऑटिज्म के कारण भेदभाव नहीं करना है। हम सब साथ मिलकर बढ़ सकते हैं।
कार्निवल का मुख्य विषय ‘ऑटिज्म जागरूकता और समावेशिता’ था। आयोजकों का उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि हम अपने आस-पास रहने वाले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समझें। उनकी चुनौतियों को जानें। इस कार्निवल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह ’‘बच्चों के द्वारा, बच्चों के लिए, बच्चों का’’ कार्यक्रम था। जिसे मुख्यतः अरिंजय जैन, तारिणी कस्बेकर, शरन्या उपाध्याय और मिराया गांधी की टीम ने मिलकर सफलतापूर्वक संपन्न किया।
कार्यक्रम में ऑटिस्टिक बच्चों ने गायन और पियानो की प्रस्तुतियां दीं, भेलपुरी, चार्म्स और बैक्स से बने उत्पादों के स्टॉल लगाए, लोगों से मिलना और पैसों का आदान-प्रदान सीखा। अन्य बच्चों नें भोजन सामग्री, स्वहस्तनिर्मित उत्पाद, बैग कस्टमाइजेशन और मनोरंजक खेलों के स्टॉल लगाये। नेहा कनोडिया के निर्देशन और डॉ. अनुष्का जैन के मार्गदर्शन में उक्त किशोरों का ग्रुप मिलकर समाजसेवा का यह कार्य कर रहा है। मियावाकी कार्निवल इसका प्रथम प्रयास है। इस ग्रुप ने यह सावित कर दिया कि किशोर चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं।

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