महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के 500 दिन पूर्ण होने पर शनिवार को बालाघाट जिले में बौद्ध समाज ने अपनी मांगों के समर्थन में विशाल धरना-प्रदर्शन और वाहन रैली का आयोजन किया। कोसमी स्थित त्रिरत्न बुद्ध विहार में आयोजित एकदिवसीय शांतिपूर्ण धरने में जिलेभर से बड़ी संख्या में भिक्षु, बौद्ध अनुयायी, महिलाएं, युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके बाद निकाली गई वाहन रैली अंबेडकर चौक पहुंची, जहां कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं बिहार सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार भगवान गौतम बुद्ध की ज्ञानस्थली होने के कारण विश्वभर के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की सर्वोच्च आस्था का केंद्र है। इसके बावजूद महाविहार का पूर्ण प्रबंधन आज भी बौद्ध समाज के हाथों में नहीं है, जो धार्मिक अधिकारों एवं ऐतिहासिक विरासत के विपरीत है।
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति के अध्यक्ष विकास खांडेकर ने कहा कि राष्ट्रीय आह्वान पर देशभर के बुद्ध विहारों में आंदोलन के समर्थन में धरना आयोजित किए गए हैं। उन्होंने मांग की कि बिहार टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (बीटीएमसी) एक्ट-1949 को समाप्त कर महाबोधि महाविहार का संपूर्ण प्रबंधन बौद्ध समाज को सौंपा जाए, ताकि भगवान बुद्ध की परंपराओं एवं बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुरूप उसका संचालन हो सके।
समिति के संरक्षक रवि पटले ने कहा कि यह आंदोलन किसी समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि बौद्ध समाज के धार्मिक अधिकारों एवं सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन का समर्थन करने वाले भिक्षुओं एवं अनुयायियों पर फर्जी प्रकरण दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने सभी प्रकरण वापस लेने तथा आंदोलनकारियों के उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की।
धरना के उपरांत निकाली गई वाहन रैली में प्रदर्शनकारियों ने नीले ध्वज, भगवान बुद्ध एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र तथा मांगों से संबंधित बैनर लेकर शहर के प्रमुख मार्गों से मार्च किया। अंबेडकर चौक पर “महाबोधि महाविहार बौद्धों को सौंपो”, “बीटीएमसी एक्ट खत्म करो” और “फर्जी मुकदमे वापस लो” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
ज्ञापन में महाबोधि महाविहार का प्रबंधन पूर्णतः बौद्ध समाज को सौंपने, बीटीएमसी एक्ट-1949 समाप्त करने, आंदोलन से जुड़े भिक्षुओं एवं अनुयायियों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने तथा बौद्ध समाज को स्वतंत्र रूप से अपने धार्मिक अधिकारों का पालन करने की अनुमति देने की मांग की गई।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि यह संघर्ष लगभग 136 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक मांग का हिस्सा है। यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो देशव्यापी आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक दायरे में रहकर जारी रहेगा।