मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सहिष्णुता केवल एक नैतिक गुण ही नहीं है, बल्कि एक शांतिपूर्ण, विकसित और प्रगतिशील समाज की आधारशिला है। यह विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और विचारों के लोगों को एक साथ मिलकर रहने की शक्ति प्रदान करती है। इसके माध्यम से समाज में एकता बनी रहती है और टकराव की स्थिति दूर होती है। सहिष्णुता एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और सशक्त समाज का मुख्य आधार है। यह विभिन्न संस्कृतियों, विचारों और धर्मों के लोगों को एक सूत्र में बांधकर रखती है।इतिहास गवाह है कि असहिष्णुता ने केवल युद्ध, विनाश और नफरत को जन्म दिया है। असहिष्णुता व्यक्ति और समाज दोनों को तनाव और गुस्से से भर देती है ।
इसके विपरीत, सहिष्णुता आंतरिक और बाहरी शांति लाती है। जब समाज में शांति होती है, तब लोग रचनात्मक कार्यों, नए आविष्कारों और व्यापार पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। एक जीवंत लोकतंत्र तभी फल-फूल सकता है, जब विरोधी विचारों को सुनने और उनका सम्मान करने का धैर्य (सहिष्णुता) हो । सहिष्णुता समाज का वह रक्षा कवच है, जो उसे टूटने से बचाता है। आज के वैश्विक और डिजिटल युग में, जहाँ भिन्न विचार बहुत तेजी से टकराते हैं, सहिष्णुता की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। यदि हम एक सुरक्षित, समृद्ध और एकजुट समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपने परिवारों और शिक्षा व्यवस्था में सहिष्णुता के बीजों को बोना होगा।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

