मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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उत्कृष्टता कोई अचानक मिलने वाली सफलता या जादुई प्रतिभा नहीं, बल्कि एक दैनिक जीवनशैली है । कोई भी बड़ा लक्ष्य केवल एक बार के प्रयास से पूरा नहीं होता, बल्कि हर दिन की जाने वाली छोटी-छोटी कोशिशों को तराशने से उत्कृष्टता जन्म लेती है । अक्सर लोग उत्कृष्टता को एक ‘प्रतिभा’ मान लेते हैं। वे सोचते हैं कि कोई व्यक्ति जन्म से ही महान होता है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। कला एक कौशल हो सकती है, लेकिन उस कौशल को निखारने और उसे शीर्ष तक ले जाने का काम ‘आदत’ करती है। यदि एक प्रतिभाशाली चित्रकार रोज़ ब्रश ना उठाए, या एक बेहतरीन धावक रोज़ अभ्यास ना करे, तो उनकी कला समय के साथ धुंधली पड़ जाएगी।
उत्कृष्टता का मार्ग रातों-रात तय नहीं होता। यह रोजमर्रा की उन छोटी-छोटी आदतों से बनता है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं ।जैसे एक खुरदरे पत्थर को रोज़ छैनी-हथौड़ी की मार सहकर एक सुंदर मूर्ति में ‘तराशा’ जाता है, वैसे ही इंसान अपनी कमियों को रोज़ सुधारकर उत्कृष्ट बनता है। हर दिन की चुनौतियाँ, असफलताएँ और उनसे सीखकर आगे बढ़ने का जज़्बा ही हमारे व्यक्तित्व को निखारता है । उत्कृष्टता कोई मंज़िल नहीं, बल्कि एक अंतहीन यात्रा है। यह किसी एक दिन की बड़ी सफलता में नहीं, बल्कि हमारे रोज़ के काम करने के तरीके में छिपती है। जब हम श्रेष्ठता को अपनी आदत बना लेते हैं, तो सफलता हमारा पीछा करने लगती है। इसलिए, आज और अभी से अपने हर छोटे कार्य को सर्वश्रेष्ठ तरीके से करने का संकल्प ही उत्कृष्टता की असली शुरुआत है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

