मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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समाज एक दर्पण (शीशे) की तरह है, हम इसके सामने जैसी छवि पेश करेंगे, हमें वैसी ही परछाई वापस दिखाई देगी। इसी तरह हम दूसरों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, समाज से हमें वैसा ही सम्मान या तिरस्कार वापस मिलता है। यदि हम दूसरों से प्रेम, सहानुभूति और सम्मान के साथ पेश आते हैं, तो लोगों के मन में हमारे प्रति वैसी ही भावनाएं जागृत होती हैं। एक मददगार और विनम्र व्यक्ति को समाज में हमेशा आदरणीय स्थान मिलता है। इसके विपरीत, यदि हमारा व्यवहार अहंकार, कटुता या धोखे से भरा है, तो हम दूसरों से सम्मान की अपेक्षा नहीं कर सकते। देर-सबेर समाज ऐसे व्यक्ति को दरकिनार व तिरस्कृत कर ही देता है ।
प्रकृति का भी यही नियम है कि जो बोया जाएगा, वही काटा जाएगा। यदि कोई बबूल का पेड़ लगाता है, तो वह आम के फलों की उम्मीद नहीं कर सकता। हमारे कर्म ही हमारे भविष्य और हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा की नींव रखते हैं। अच्छे कर्मों का परिणाम सुखद होता है, जबकि बुरे कर्मों का अंत हमेशा पतन और ग्लानि में होता है । यदि हम एक शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं, तो हमें अपने आचरण को सुधारना होगा। हमें दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए, जैसा हम स्वयं के लिए दूसरों से चाहते हैं। अंततः, समाज में मिलने वाला सम्मान या तिरस्कार हमारी ही ‘करनी’ का प्रतिबिंब है। इसलिए, हमेशा नेक कर्म करें ताकि जीवन में सम्मान और सकारात्मकता की ही ‘भरनी’ हो।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

