मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिंदगी में जब मुश्किलें आती हैं, तो वे हमारे धैर्य और साहस की परीक्षा लेती हैं। जो लोग इन परिस्थितियों में संयम बनाए रखते हैं, बिना किसी शिकायत या शोर-शराबे के ‘खामोशी’ से संघर्ष करते हैं, वे वक्त के साथ और अधिक मजबूत हो जाते हैं । खामोशी का मतलब कायरता नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण है। ऐसे लोग अपनी ऊर्जा को रोने-धोने में बर्बाद करने के बजाय समाधान ढूंढने में लगाते हैं। अंततः, उनका यही जुझारूपन उनके व्यक्तित्व को एक नई चमक और निखार देता है । इसके विपरीत, कुछ लोग परिस्थितियों के सामने घुटने टेक देते हैं। जब जीवन में दुख या असफलता आती है, तो वे अत्यधिक भावुक हो जाते हैं।
वहीं क्रोध, निराशा, डर या अवसाद जैसी भावनाएं जब इंसान के विवेक पर हावी हो जाती हैं, तो वह सही और गलत का अंतर भूल जाता है। भावनाओं के तीव्र वेग में बहकर व्यक्ति अक्सर गलत फैसले ले लेता है, जिससे उसका बना-बनाया जीवन, रिश्ते और करियर ताश के पत्तों की तरह बिखर जाते हैं। परिस्थितियों से लड़ने के बजाय वे खुद को असहाय मान लेते हैं, जो उनके पतन का कारण बनता है। उतार-चढ़ाव जीवन का शाश्वत नियम है, इससे कोई बच नहीं सकता। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उनका सामना कैसे करते हैं। यदि हम मुश्किल समय में अपनी भावनाओं के गुलाम बन जाएंगे, तो हमारा बिखरना तय है। लेकिन अगर हम धैर्य, शांति और खामोशी के साथ तूफानों का सामना करेंगे, तो हम और अधिक निखरकर सामने आएंगे।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

