Thursday, June 11, 2026
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मशहूर होने में बरसों लग जाते हैं, परंतु बदनाम होने के लिए एक लम्हा ही है काफी

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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यह कड़वा सच है कि इंसान की अच्छाइयों की उम्र अक्सर छोटी होती है, जबकि उसकी एक गलती ‘अमर’ हो जाती है। सदियों की मेहनत से बना महल एक माचिस की तीली से खाक हो सकता है—चरित्र और छवि के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। इंसान अपनी पूरी जिंदगी नेकियाँ कमाने, उसूलों पर चलने और दूसरों का भरोसा जीतने में लगा देता है। वह ईंट-दर-ईंट अपने सम्मान की दीवार खड़ी करता है। लेकिन समाज का दस्तूर बड़ा ही अजीब है, हम किसी की हजार अच्छाइयों को एक गलती के तराजू में तौलकर उसे खारिज कर देते हैं। कल्पना कीजिए एक सफेद बेदाग चादर की। अगर उस पर एक छोटा सा स्याही का धब्बा गिर जाए, तो देखने वाले की नजर पूरी चादर की सफेदी पर नहीं, बल्कि उस एक बिंदु पर टिक जाती है। हमारा चरित्र भी वैसा ही है। सालों का अनुशासन और संयम एक पल के गुस्से, एक गलत फैसले या एक छोटी सी चूक के सामने अक्सर हार जाते हैं।
गलतियाँ अक्सर तब होती हैं जब हमारा ‘विवेक’ हमारे ‘आवेग’ से हार जाता है। वो चंद पल, जिनमें हम खुद पर नियंत्रण खो देते हैं, हमारी पूरी पहचान बदल सकते हैं क्योंकि मशहूर होने में बरसों लग जाते हैं, परंतु बदनाम होने के लिए एक लम्हा ही काफी है। यहां यह विडंबना है कि दुनिया आपकी ‘निरंतरता’ व अच्छाई को याद नहीं रखती, बल्कि आपके ‘अपवाद’ को याद रखती है। लोग यह भूल जाते हैं कि गलती करना मानवीय स्वभाव है। अक्सर एक गलती को इंसान का ‘असली चेहरा’ मान लिया जाता है, जबकि वह उसकी जिंदगी का सबसे कमजोर क्षण हो सकता है। हर बड़ा फैसला लेने से पहले या गुस्से के चरम पर होने के दौरान ‘मौन’ रहना सीखें। वो चंद पल ही तय करते हैं कि आपका इतिहास क्या होगा। यदि हम जानते हैं कि एक पल की गलती किसी का भी जीवन बिगाड़ सकती है, तो हमें दूसरों की उम्र भर की अच्छाइयों को उनकी एक भूल के कारण नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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