Friday, April 17, 2026
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रन फॉर अंबेडकर-रन फॉर कंस्टीट्यूशन 21वीं सदी की सामाजिक समता की लड़ाई का बिगुल-राजेंद्र पाल गौतम

मूकनायक/
भोपालसिंह जाटव/
मध्य दिल्ली

संविधान निर्माता और देश में हज़ारों सालों से चल रहे बहुजन उत्पीड़न के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने वाले हम सब के प्रेरणा स्रोत भारत रत्न डॉ भीम राव अम्बेडकर के 135वें जन्म दिवस पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग द्वारा जन नायक व लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी जी की प्रेरणा से 12 अप्रैल 2026 को दिल्ली में रन फॉर अंबेडकर-रन फॉर कंस्टीट्यूशन मैराथन का आयोजन किया जायेगा।

इस ऐतिहासिक मैराथन को हरी झंडी श्री राहुल गांधी दिखाएंगे क्योंकि यह मैराथन सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि संविधान, समानता और बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है, जो भारत देश में बहुजन क्रांति का प्रतीक बनेगी। रन फॉर अंबेडकर-रन फॉर कंस्टीट्यूशन मैराथन में युवा बहुजन की भागीदारी विशेष रूप से होने वाली है।
यह दौड़, उस सामाजिक उत्पीड़न के खिलाफ बहुजन की आवाज होगी जो देश की आजादी के 78 वर्षों के बाद आज भी दलित, पिछड़े और वंचितों को समाज हर स्तर पर व्याप्त है। यह दौड़ है दलितों, वंचितो, पिछड़ों, अति पिछड़ों और आदिवासियों को न्याय दिलवाने के लिए है, जिनकी सामाजिक और राजनीतिक आवाज़ को आज 21वीं सदी के दौर में भी दबाया जाता है ।

यह दौड़, उस औछी मानसिकता के खिलाफ है जो दलितों, पिछड़ों और आदिवासी छात्रों को उत्पीड़न से बचाने के लिए यूजीसी रेगुलेशन के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध करता है और जो नही चाहता के वंचित वर्ग के छात्रों के खिलाफ विश्वविद्यालयों में भेदभाव और उत्पीड़न समाप्त हो।

यह दौड़, उन होनहार वेमुला जैसे वंचित वर्ग के छात्रों के अधिकारों को दिलवाने के लिए, जो समाज में आज भी व्याप्त छुआछूत का शिकार बनकर अपनी जान गँवा रहे हैं। ये दौड़ है, केंद्रीय विश्वविद्यालय में दलितों, पिछड़ों और अनुसूचित जाति/जन जातियों की नौकरियों को बचाने की, जो मनुवादी मानसिकता के तहत एन.एफ.एस. (नाट फाउंड सूटेबल) करके उनके हक़ को छीने जाने के खिलाफ।

ये दौड़ है, महात्मा गांधी, सत्यशोधक महात्मा ज्योतिबा फुले, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, पेरियार, सावित्री बाई फुले, जगजीवन राम, कांशी राम के अधूरे सपनों को पूरा करने की, जिन्होंने जीवन भर संघर्ष करके वंचितों की लड़ाई को लड़ा।
ये दौड़ है, उस दलित उत्पीड़न के खिलाफ जहाँ आज भी दलित, वंचित, पिछड़ा वर्ग और आदिवासी महिलाओं के साथ सरे आम शारीरिक शोषण, उत्पीड़न और अत्याचार किया जाता है और पुलिस तंत्र और प्रशासन सिर्फ मूक दर्शक बना रहता है। ये दौड़ उत्पीड़न और अत्याचार से पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए है जो न्याय की आस में दर-दर भटकती है और अधिकतर न्याय न मिलने पर अपनी जान भी गंवा देती हैं।

ये दौड़ है, उस सामाजिक असमानता के खिलाफ है जहाँ आज भी मेला ढोने के खिलाफ बने क़ानून होने के बावजूद दलित वर्ग के लोगों से या तो मेला ढुलवाया जाता है या सीवर और सेफ्टी टैंक की बिना सेफ्टी किट के मेन होल में उतार दिया जाता है। सीवर में जहरीली गैस के कारण दलित मज़दूरों की मौत हो जाती है और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ़ सरकारें लीपा पोती करके दलितों के जीवन को बचाने की दौड़ है।

ये दौड़ है उस प्रशासनिक विषमता के खिलाफ है जहाँ आज भी दलित, वंचित, पिछड़ा और आदिवासी वर्ग के अधिकारियों को देश की नीति निर्माण की व्यवस्था और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से दूर रखा जाता है। ये दौड़, बहुजन समाज को निति निर्माण में पूर्ण भागीदारी दिलाने के लिए है।

ये दौड़ है, ‘जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी भागीदारी’ को लागू करवाने की ताकि देश की 85% आबादी को उनकी आबादी के अनुपात पर देश की व्यवस्था में बराबर हक़ मिल सके।

मुझे पूरा विश्वास है कि रन फॉर अंबेडकर-रन फॉर कंस्टीट्यूशन मैराथन के माध्यम से दलित, वंचित, पिछड़ा और आदिवासी वर्ग में चेतना जागृत होगी। हम सब बहुजन समाज सहित पूरा देश श्री राहुल गांधी जी के नेतृत्व में अपने हक की लड़ाई के लिए एक सुर में आवाज़ उठाकर देश की व्यवस्था में जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए आगे बढ़कर संघर्ष करेंगे।

राजेन्द्रपाल गौतम
राष्ट्रीय चेयरमैन
अनुसूचित जाति विभाग
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

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