मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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बहुत बार हम धागे ही इतने कमजोर चुन लेते हैं कि पूरी जिंदगी ही गाँठ बाँधने में गुज़र जाती है । अपनापन कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि एक विश्वास है, जहां सुख में हंसी, संकट में साथ देने की जिम्मेदारी होती है । यहां झूठे वादे नहीं, बल्कि सच्ची कोशिशें की जाती है । मतलबी रिश्ता तो कोयलें की तरह होता है । जब गर्म होता है तो हाथ जला देता है और जब ठंडा होता है तो हाथ काले कर देता है।
क्रोध में बोला हुआ एक कठोर शब्द इतना ज़हरीला हो सकता है कि आपकी हजार प्यारी बातों को एक मिनट में नष्ट कर सकता है !!..कुछ लोग मतलब के लिए ही रिश्ता जोड़ते हैं और अपना काम बनाकर सच्चे लोगों का दिल तोड़ते हैं । वह समझते हैं कि उनसे ज्यादा चालाक कोई नहीं है, परंतु हकीकत में वह खुद अपनी ही किस्मत फोड़ते है!
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

