मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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स्वार्थी लोग और धूल दोनों ही परिस्थितियों के अनुसार अपनी दिशा बदल लेते हैं, जहाँ फायदा होता है, वहीं चले जाते हैं, लेकिन धूल के विपरीत, स्वार्थी व्यक्ति अपने स्वार्थ में इतना लिप्त होता है कि वह दूसरों के लिए बाधा बन सकता है, जबकि हवा रुकने पर धूल नीचे बैठ जाती है, परंतु स्वार्थी व्यक्ति अपनी चाल बदलता रहता है, जिससे रिश्ते बिखर जाते हैं और अंत में अकेला रह जाता है, परंतु एक दिन हवा (परिस्थिति) अवश्य बदलती है और सच्चाई सामने आती है। धूल जब हवा में होती है, तो सब कुछ धुंधला कर देती है, उसी प्रकार स्वार्थी लोग अपने स्वार्थ से संबंधों और रिश्तों की सच्चाई को धुंधला कर देते हैं।
स्वार्थी लोगों से हम जीवन का कड़वा सबक सीखते हैं कि कौन सच्चा है और कौन सिर्फ मतलब का साथी है । स्वार्थी लोग और धूल की तुलना हमें यह भी बताती है कि हमें ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए जो केवल अपने फायदे के लिए बदलते रहते हैं। हवा रुकने पर धूल बैठ जाती है, लेकिन स्वार्थी लोग हवा के बदलते ही अपना रंग दिखाते हैं। हमें ऐसे लोगों से दूर रहकर, अपने मूल्यों पर दृढ़ रहना चाहिए क्योंकि जीवन में कभी ना कभी हवा थमती है और तब धूल नहीं, बल्कि सच्चाई सामने आती है और स्वार्थी व्यक्ति अकेला पड़ जाता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

