मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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संसार जरूरत के नियमों पर चलता है” एक कहावत है जिसका अर्थ है कि दुनिया में किसी व्यक्ति की कीमत या अहमियत तभी होती है जब उसकी किसी और को ज़रूरत हो, ठीक वैसे ही जैसे सर्दियों में धूप प्रिय होती है पर गर्मियों में वही धूप असहनीय हो जाती है। यह दर्शाता है कि लोगों का व्यवहार और उनके रिश्ते अक्सर उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों से संचालित होते हैं। सर्दियों में जिस सूरज का इंतजार होता है। उसी सूरज का गर्मियों में तिरस्कार भी होता है।
अतः आपकी कीमत तब होगी, जब आपकी जरूरत होगी और यह भी याद रखें कि वह कीमत आपकी नहीं बल्कि उसकी है, जो आपके पास है । फिर चाहे दौलत हो या पद हो… और एक कड़वा सच ये भी है कि सफल और अमीर हुए बिना किसी से इज्ज़त पाने की उम्मीद मत करना, ना ही अपनों से और ना ही गैरों से क्योंकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो सिर्फ हमारे सामने ही, हमारे होते हैं। बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि जो व्यक्ति दूसरों का हक और खुशी छीन लेता है, उसके सुख की उम्र भी कोई ज्यादा लम्बी नहीं होती…
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

