मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर गुस्से में हम कभी – कभी कुछ ऐसा बोल देते हैं, जो नहीं बोलना चाहिए और बाद में इसका परिणाम भुगतना पड़ता है । दूसरों को दोष देने से बेहतर है कि आप अपनी भावनाओं और कार्य की जिम्मेदारी खुद लें। जो होना था, वो हो गया और बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता । आगे नकारात्मक सोचने से बेहतर है कि आप वैकल्पिक उपाय के बारे में सोचो, जिससे समस्या का समाधान निकले ।
किसी की गलती की वजह से गुस्सा आए तो उसे नजरंदाज और माफ करके आगे बढ़ो क्योंकि किसी के लिए भी मन में शत्रुता या शिकायत रखने से गुस्सा बढ़ता ही है।एक्सरसाइज करो या फिर थोड़ा टहल लेने से मांशपेशियों को आराम मिलता है। गुस्से में कभी भी कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। ज्यादा समय बर्बाद ना हो, इसलिए दिमाग को किसी दूसरे काम में उलझा देने से परिस्थितयां नॉर्मल हो जाती है। इन सबसे भी कुछ ना हो तो हास्यपूर्ण शो देख लो, गाने सुनो, पानी पियो। जब दिमाग शांत हो जाए तब गुस्से के पीछे के कारणों पर गहन विचार करके समस्या का समाधान खोजें ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

