मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हवा, पानी और अन्न का मानव जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है, वहीं जीवन को सुखमय व आनंदमई बनाने के लिए पैसे का महत्व भी कम नहीं है, परंतु हवा, पानी, अन्न और पैसे आदि की सभी सुख सुविधाएं भरपूर मात्रा में मिलने के बावजूद आज मानव सुखी व संतुष्ट नहीं हैं । अगर ये सब चीजें जीवन को परिपूर्ण बनाने वाली होती तो सामान्य लोगों के साथ साथ धनाढ्य लोग बेचैनी की रातें नहीं काट रहे होते । वहीं स्वार्थ व्यक्ति को अपने स्वजनों एवं समाज से दूर ले जाकर नकारात्मक हालातों की ओर धकेलता है। परिणाम स्वरूप व्यक्ति अकेला रह जाता है। स्वार्थ शीशे में फैली धूल की तरह है, जिसकी वजह से व्यक्ति अपना प्रतिबिब नहीं देख पाता और वह स्वार्थ में लिप्त होकर सिर्फ अपनी भलाई के बारे में ही सोचता है। वास्तव में ऐसा करते समय वह खुद को छल रहा होता है ।
स्वार्थ, ईर्ष्या, लालच, लोभ आदि मूल्य की दृष्टि से गलत आचरण हैं। इस संदर्भ में धर्म कहता है कि हमें संतोष करना सीखना चाहिए। अगर व्यक्ति लालच न करे, तो वह कम वेतन में भी चैन से जीवन बिता सकता है। लेकिन लालच करने वालों को कभी चैन नहीं मिल सकता, क्योंकि उसे जितना भी मिले, उससे उसका लालच बढ़ता जाता है। यहां असली समस्या यह है कि आज जो कुछ हमारे पास है, उसको हम स्वार्थ व लालच के फलस्वरूप संभाल पाने की स्थिति में नहीं है और असमर्थ हैं, क्योंकि हम बहुत कुछ पाने व हासिल करने के लिए इधर उधर भटक रहे हैं और आत्म संतुष्ट नहीं हैं ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

