
मूकनायक/कमलेश लवहात्रै
दुर्ग छत्तीसगढ़
दुर्ग में जिला स्तरीय एक माह के धरने प्रदर्शन में तेइसवें दिन ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम छत्तीसगढ़ के नेतृत्व और समता सुरक्षा सेना के संरक्षण एवं समस्त बौद्ध अम्बेडकरी संगठनों के सहयोग से महारैली का आयोजन किया गया । जिसमें दुर्ग,भिलाई,चरोदा,कुम्हारी,रायपुर ,धनौरा और मातृशक्ति संगठन आदि से लोगों का जनसैलाब उमड़ आया। लगभग दो हजार से भी अधिक संख्या में लोगों ने महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन धरना प्रदर्शन को समर्थन करते हुए अपनी एकता और शक्ति का प्रदर्शन किया । साक्षी बौद्ध के निर्देशन में बच्चों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महाबोधी महाविहार का इतिहास बताकर लोगों को अपने धर्म और आ संस्कृति के प्रति जागरूक किया । समता सुरक्षा सेना के कर्मठ , कर्तव्यनिष्ठ और जुझारू कार्यकर्ता अरविंद चौधरी और अनिल जोग जी के कुशल संरक्षण एवं व्यवस्थापन में पिछले 23 दिनों से धरना प्रदर्शन सुचारू तथा सफलता पूर्वक संचालित हो रहा है। समता सुरक्षा दल प्रमुख की उपस्थिति सराहनीय रही। सभी संगठनों ने धरने प्रदर्शन में अपने स्तर पर कार्यभार संभाला और आंदोलन को गति प्रदान कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। बौद्ध समाज के सभी संगठनों ने ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम छत्तीसगढ़ की प्रदेश अध्यक्ष सामनेरी खेमा उर्फ सविता बौद्ध संकल्पी के नेतृत्व में महारैली के माध्यम से केंद्र शासन प्रशासन विशेषकर बिहार राज्य की सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की है कि बोधगया के महाबोधी महाविहार में बीटीएमसी के बीटी एक्ट 1949 को निरस्त किया जाय । वैसे भी बीटी एक्ट 1949 रद्द ही है । क्योंकि यह एक्ट भारत का संविधान लागू होने के पूर्व का है,जो संविधान के आर्टिकल 13 के अनुसार ऐसे ही रद्द हो जाता है। फिर भी 75 वर्षों से यह असंवैधानिक कानून बोधगया के महाबोधी महाविहार में कायम है।यह सरासर भारतीय संविधान का उल्लंघन है। दुर्ग जिले के कलेक्टर महोदय को संपूर्ण बौद्ध संगठनों ने एक साथ एक मंच ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति,मुख्यमंत्री,बिहार और राज्यपाल के नाम चार प्रतियों में ज्ञापन सौंपा। तत्पश्चात शांतिपूर्ण अपने धरने स्थल पर लौटे । पिछले 23 दिनों से धरने स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए अरविंद चौधरी,अनिल जोग,विजय बोरकर,आनंद रामटेके,सुदेश कुमार,रामाराव ढोक,अशोक मेश्राम,अल्का बौद्ध, इंदु ढोक,महेंद्र चौहान,विनोद वासनिक,अजय शेडे,महेंद्र बौद्ध ने किया। अरविंद चौधरी ने कहा बिहार राज्य में बीटी एक्ट 1949 काला कानून चल रहा है,जहां 4 बौद्ध और पांच गैरबौद्धों का कब्जा है। यह बौद्धों के हित में नहीं है। यदि इस एक्ट को समाप्त नहीं किया गया तो अब हम उग्र आंदोलन करने के लिए तैयार है। अनिल जोग ने बिहार सरकार की घोर निंदा करते हुए कहा कि ईसाई भाई अपने चर्च में अपनी प्रार्थना करते है,सिक्ख भाई अपने गुरुद्वारे में,मुस्लिम भाई अपनी मस्जिद में और हिन्दू भाई अपने मंदिर में लेकिन बिहार के बोधगया में महाबोधी महाविहार में इसके विपरीत होता है वहां महंतो का राज चलता है, इसलिए बुद्ध की ज्ञान स्थली में उनके सिद्धांतों के विपरीत पांच पांडव,अन्नपूर्णा ,शिवलिंग की पूजा, श्राद्ध, आदि अबौद्ध कार्य किए जाते है। बौद्ध समाज यह कदापि मंजूर नहीं कर सकता। प्रदेशाध्यक्ष सविता बौद्ध संकल्पी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है क्रांति पर प्रतिक्रांति हुई है। महाबोधी महाविहार का संघर्ष अनागारिक धम्मपाल से हुआ । महाबोधी महाविहार की दुर्दशा देखकर वे बहुत दुखी हुए क्योंकि वहां बौद्धों का प्रवेश वर्जित था ।इन्होंने पहली बार इस आंदोलन को खड़ा किया तथा ब्रिटिश शासन काल में यह लड़ाई लड़ी जिसका परिणाम यह हुआ कि महाबोधी में बौद्धों और अन्य लोगों को पूजा वंदना करने का अधिकार मिला,यह बौद्धों की पहली जीत थी । महाबोधी की दूसरी लड़ाई पूज्य भंते नागार्जुन सुरई ससाई जी के नेतृत्व में 1992 में शुरू हुई और 1996 तक चली। जिसके फलस्वरूप पूज्य भंते प्रज्ञाशील जी को बीटीएमसी में महासचिव का पद मिला। यह बौद्धों की दूसरी जीत थी । अब 134 वर्षों बाद आदरणीय आकाश लामा जी के नेतृत्व में 2023 से महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन की तीसरी लड़ाई शुरू है । जिसमें नागार्जुन सुरई ससाई जी की 2012 की याचिका पर पूरे 12 वर्ष बाद 29 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है । बौद्धों को भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट पर पूरा विश्वास है कि वे बौद्धों के साथ न्याय करेगी । बौद्धों की विरासत ,विश्व धरोहर और बुद्ध की पवित्र ज्ञान स्थली को गैर बौद्धों से मुक्त कर बीटी एक्ट 1949 को पूर्णतया निरस्त करने का फैसला सुनाएगी। यह हमारी तीसरी जीत है और हम इसे हासिल करके ही रहेंगे क्योंकि हमारी मांग संवैधानिक है। 24 जुलाई को भिक्कुनी खेमा के नेतृत्व में एक टीम दिल्ली रवाना हुई जहां महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन हेतु 25 और 26 जुलाई को जंतर मंतर पर देशव्यापी धरना प्रदर्शन होगा।
आंदोलन को प्रारंभ से सहयोग करने वाले क्रांतिकारी साथी है जयश्री बौद्ध,आशीष चौहान,सुलोचना बौद्ध,करुणा भालाधरे,घनश्याम लांजेवार,पूनम,रसिया सहारे,डॉ सरोज बौद्ध,भूपत बोरकर,शशि रंगारी,काली मेश्राम,इंदु ढोक ,लतिका खांडेकर,सविता मेश्राम, अर्चना वासनिक,संतोष नंदा,भीमराव कटाने,मंगला गेडाम,माधुरी रंगारी,श्रेया,प्रतीक्षा,रिया,अक्षिता ,साक्षी बौद्ध और संपूर्ण समता सुरक्षा सेना की यूथ टीम आदि।

