मूकनायक समाचार । सूरत
सूरत के नासीरनगर क्षेत्र में मकानों को तोड़ने के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के खिलाफ फोजदारी अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू की है। हाईकोर्ट के जस्टिस निखिल केरियल ने सूरत म्युनिसिपल कमिश्नर और स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन को 27 नवंबर को कोर्ट में रूबરૂ उपस्थित रहने का आदेश दिया है। दोनों अधिकारियों को कोर्ट के सामने उपस्थित रहकर खुलासा करना होगा कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।
नासीरनगर में मकानों को तोड़ने के बाद प्रभावित लोगों को वैकल्पिक आवास देने की खातरी दी गई थी। हालांकि, बाद में सूरत मनपा ने अपना रुख बदलते हुए वैकल्पिक आवास नहीं देने का फैसला कर दिया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि सूरत मनपा के अधिकारियों के कृत्य के कारण पहली नजर में अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की स्थिति उत्पन्न हुई है। इसलिए म्युनिसिपल कमिश्नर और स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन की कोर्ट में हाजिरी आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने नोट किया कि नागरिकों के रहने के स्थानों को तोड़ दिया गया था और कॉर्पोरेशन द्वारा प्रभावित लोगों को उचित आवास देने की खातरी भी दी गई थी। इसके बावजूद अब कॉर्पोरेशन पहले दी गई खातरी से हटने का प्रयास कर रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों ने पहले के फैसले से अलग रुख अपनाया है, उन्हें कोर्ट में रूबરૂ हाजिर होकर अपना पक्ष रखना होगा। कोर्ट के मुताबिक, वकील उनके वती से रुख में आए बदलाव के बारे में प्रभावी ढंग से खुलासा नहीं कर सकते हैं।
इस साथ ही हाईकोर्ट ने सूरत म्युनिसिपल कमिश्नर और स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन की तरफ से पेश की गई दलीलों को ठुकरा दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी, जिसमें दोनों अधिकारियों को हाजिर होकर अपना खुलासा देना होगा।

