📚 शिक्षक दिवस विशेष — शिक्षा की वह ज्योति, जिसने इतिहास बदल दिया*
मूकनायक
बिलासपुर
*5 सितंबर के शिक्षक दिवस* के अवसर पर उन महान शिक्षागुरुओं और समाज-परिवर्तकों को कोटि-कोटि नमन, जिन्होंने शिक्षा को केवल अक्षर-ज्ञान नहीं, बल्कि समानता, आत्मसम्मान, स्वतंत्र सोच और अधिकारों की कुंजी बनाया।
एक समय भारतीय समाज में जाति और लिंग आधारित भेदभाव ने शिक्षा के अवसरों को सीमित कर रखा था। ऐसे कठिन दौर में माता सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी मशाल जलाई, जिसकी रोशनी आज भी दिखाई देती है। 1848 में पुणे के भिड़े वाड़ा में लड़कियों के लिए विद्यालय शुरू करना उस समय एक क्रांतिकारी कदम था। सावित्रीबाई ने सामाजिक विरोध के बावजूद पढ़ाने का कार्य जारी रखा। माता फातिमा शेख ने भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़कियों और वंचित समुदायों की शिक्षा के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
और फिर आए *बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर* जिन्होंने अपने जीवन में जातिगत भेदभाव और अपमान का सामना करते हुए भी शिक्षा को अपना सबसे बड़ा आधार बनाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और आगे चलकर संविधान निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनका जीवन बताता है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, ज्ञान मनुष्य को अपनी दिशा स्वयं चुनने की शक्ति देता है।
🌸 कुछ पंक्तियाँ—
“जिसे दुनिया ने रोकना चाहा, उसने इतिहास लिख दिया,
जिस हाथ को कलम से दूर रखा, उसी हाथ ने भविष्य लिख दिया।
किताब उठाओ, सवाल करो, ज्ञान को अपना साथी बनाओ,
अंधेरों से मत डरो कभी, शिक्षा की मशाल जलाओ।”
आज शिक्षक दिवस पर केवल महान व्यक्तित्वों को याद करना ही पर्याप्त नहीं है। हमें उनके अधूरे सपने को आगे बढ़ाना है—हर बच्चे तक शिक्षा पहुँचानी है, हर बेटी को पढ़ने का अवसर देना है और किसी भी इंसान को जन्म, जाति, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर ज्ञान से वंचित नहीं होने देना है।
बाबासाहेब का संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” आज भी समाज को दिशा देता है। शिक्षा के महत्व को लेकर उनके विचार और उनके द्वारा स्थापित People’s Education Society जैसे प्रयास भी इसी सोच को दर्शाते हैं।
आइए, इस शिक्षक दिवस पर संकल्प लें—
हर घर में किताब होगी, हर हाथ में कलम होगी,
हर मन में सवाल होगा और हर इंसान के लिए सम्मान होगा।
माता सावित्रीबाई फुले, महात्मा ज्योतिराव फुले, माता फातिमा शेख और बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अंबेडकर को कोटि-कोटि नमन।
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। 📚💙✊





