मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
किसी भी मज़बूत इमारत की तरह, एक खूबसूरत रिश्ते की नींव भी रातों-रात या अचानक तैयार नहीं होती। रिश्ते समय, भरोसे, आपसी समझ और निरंतर प्रयासों की ईंटों से बनते हैं। जब परिवार के सभी लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होते हैं, तब जाकर एक मज़बूत सामाजिक और भावनात्मक रिश्ते का निर्माण होता है। विश्वास, संवाद, त्याग और आदर ही वे गार-पत्थर हैं, जो रिश्ते को जोड़े रखते हैं। शुरुआत में हर कोई अपना योगदान देता है, परंतु रिश्तों का पतन तब शुरू होता है, जब ‘हम’ की जगह ‘मैं’ ले लेता है। जब एक पक्ष समझता है कि “मैं ही क्यों झुकूं?” तो वह अपने हिस्से की ईंट खींच लेता है। दूसरा भी अहंकारवश दूसरी ईंट हटाता है। इमारत गिरती नहीं, बल्कि भीतर से खोखली होकर ढह जाती है।
जब बातचीत की जगह खामोशी ले लेती है, जब परवाह की जगह उपेक्षा आ जाती है और जब माफ करने की जगह शिकायतें घर कर लेती हैं, तो समझ लेना चाहिए कि नींव की ईंटें खिसक रही हैं। एकतरफा प्रयासों से कभी भी किसी रिश्ते की इमारत को लंबे समय तक खड़ा नहीं रखा जा सकता। जब रिश्ते में मौजूद हर इंसान सिर्फ अपने अधिकारों की बात करने लगता है और अपने हिस्से का फर्ज निभाने से कतराता है तो वह अनजाने में अपने हिस्से की ईंट खींच रहा होता है। अंततः, जब यह खोखलापन अपनी चरम सीमा पर पहुंचता है, तो पूरा का पूरा रिश्ता भरभराकर ढह जाता है। यदि हम चाहते हैं कि हमारे अपनों से संबंध हमेशा अटूट और मजबूत रहें तो हमें ईंटें खींचने के बजाय, हर दिन प्रेम और समर्पण की नई ईंटें जोड़नी होंगी।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

