Tuesday, September 29, 2026
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मूकनायकन पक्ष में, न विपक्ष में—तथ्यों के पक्ष में,अयोध्या राम मंदिर चढ़ावाचार बक्से, 73,480 पन्ने और 105 CCTV घटनाएं,

मूकनायक
न पक्ष में, न विपक्ष में—तथ्यों के पक्ष में,अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा
चार बक्से, 73,480 पन्ने और 105 CCTV घटनाएं,

मूकनायक विशेष रिपोर्ट

कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी

////राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आठ आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल — 173 गवाह, करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी; ट्रस्ट के तीन वरिष्ठ पदाधिकारी आरोपी नहीं, गवाह////

    अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और हेराफेरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस ने आठ आरोपितों के विरुद्ध 73,480 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में दाखिल किया है।

    आरोपपत्र की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे चार बड़े बक्सों में अदालत तक पहुंचाया गया।
  जांच एजेंसी के अनुसार आरोपपत्र में CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा, कथित चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों एवं लेन-देन, बरामदगी, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं।


  चार्जशीट से संबंधित प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार मंदिर के चढ़ावा-गणना कक्ष में 105 कथित घटनाएं CCTV फुटेज में चिन्हित की गई हैं। जांच में 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है।
  हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध होना बाकी हैं। इसलिए आरोपित व्यक्तियों को इस रिपोर्ट में अपराधी नहीं, बल्कि आरोपित कहा जा रहा है।

आठ आरोपितों के नाम
पुलिस ने इस मामले में निम्न आठ व्यक्तियों को आरोपित बनाया है—

  1. अनुकल्प मिश्र
    पुलिस ने उन्हें मामले का कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया है। जांच एजेंसी के अनुसार अन्य आरोपितों के साथ समन्वय और चढ़ावे की रकम को कथित रूप से हटाने की गतिविधियों में उनकी भूमिका की जांच की गई है।
  2. अविनाश शुक्ला उर्फ शनि
    चार्जशीट में CCTV फुटेज के आधार पर उनकी कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार उनके पास से नकदी, विदेशी मुद्रा और अन्य वस्तुओं की बरामदगी हुई है।
  3. करुणेश पाण्डेय
    जांच एजेंसी के अनुसार CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों में उनकी कथित भूमिका सामने आई है।
  4. मनीष कुमार यादव
    चार्जशीट में CCTV तथा अन्य जांच सामग्री के आधार पर उनकी कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है।
  5. लवकुश मिश्र
    पुलिस के अनुसार उन्हें कथित रूप से अन्य आरोपितों की सहायता और घटनाओं से जोड़ा गया है।
  6. रमाशंकर मिश्र
    जांच एजेंसी ने CCTV और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनकी कथित भूमिका का उल्लेख किया है।
  7. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
    चार्जशीट में दानपात्रों की चाबियों तथा अन्य गतिविधियों से संबंधित आरोपों का उल्लेख किया गया है।
  8. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
    सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका चढ़ावा-गणना प्रक्रिया से जुड़ी बताई गई है। चार्जशीट में उनकी भूमिका से संबंधित साक्ष्यों का भी उल्लेख है।

////कानूनी स्थिति////:

उपरोक्त सभी व्यक्ति इस मामले में आरोपित हैं। आरोपपत्र दाखिल होना दोष सिद्धि नहीं है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के बाद किया जाएगा।

 ///CCTV में 105 कथित घटनाएं,////जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में CCTV फुटेज शामिल है।

पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में लगभग 70 घटनाओं की जानकारी सामने आई थी। विस्तृत CCTV विश्लेषण के बाद 105 कथित घटनाओं को चार्जशीट में शामिल किया गया।
जांच एजेंसी ने CCTV फुटेज के साथ मोबाइल डेटा, कथित चैट, कॉल डिटेल, बैंक लेन-देन और गवाहों के बयानों को भी अपनी विवेचना का हिस्सा बनाया है।
रिपोर्टों के अनुसार जांच में आरोपितों के बीच लगभग 3,300 मोबाइल संदेशों का भी विश्लेषण किया गया है।

///करीब 79.85 लाख रुपये की नकद बरामदगी///

जांच एजेंसी के अनुसार आरोपितों से संबंधित कार्रवाई में लगभग 79.85 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा सोना-चांदी, अमेरिकी डॉलर, वाहन तथा अन्य संपत्तियों से संबंधित सामग्री की भी जांच की गई।

///रिपोर्टों में आरोपितों से संबंधित बरामदगी का विवरण इस प्रकार सामने आया है—
आरोपित
रिपोर्टों में उल्लेखित नकद बरामदगी///

//अविनाश शुक्ला///

करीब ₹20.39 लाख
अनुकल्प मिश्र
करीब ₹16.82 लाख

///लवकुश मिश्र//

करीब ₹14.25 लाख
करुणेश पाण्डेय
करीब ₹18.07 लाख

///रमाशंकर मिश्र//

करीब ₹7.32 लाख
मनीष कुमार यादव
करीब ₹2 लाख

///रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू//

करीब ₹1 लाख

///सुभाष चंद्र श्रीवास्तव///

उपलब्ध रिपोर्टों में नकद बरामदगी का उल्लेख नहीं
इसके अतिरिक्त कुछ आरोपितों से विदेशी मुद्रा, सोना-चांदी और अन्य वस्तुओं की बरामदगी की जानकारी भी सामने आई है।

///गणना कक्ष के बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद होने का उल्लेख///

चार्जशीट से संबंधित रिपोर्टों में 4 जून 2026 को गणना कक्ष के बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद किए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस के अनुसार चेकिंग शुरू होने के बाद रकम वहां छिपाए जाने की बात जांच में सामने आई। इस घटना से संबंधित वीडियो तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को भेजे जाने का भी रिपोर्टों में उल्लेख है।
///173 गवाह और व्यापक दस्तावेजी जांच///

इस मामले की विवेचना में 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इसके अलावा जांच एजेंसी ने आरोपितों के मोबाइल फोन, कथित चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खाते, जमा पर्चियां, वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है।
पुलिस ने इन सभी साक्ष्यों को एक साथ रखते हुए अपना आरोपपत्र अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया है।
////चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव आरोपी नहीं, गवाह///

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक यह है कि जांच के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों—
चंपत राय
डॉ. अनिल मिश्र
गोपाल राव
को आरोपित नहीं बनाया गया है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इन लोगों को अभियोजन पक्ष के गवाह बनाया गया है।
जांच एजेंसी की ओर से ट्रस्ट के बैंक खातों अथवा प्रबंधन की आपराधिक संलिप्तता के संबंध में पर्याप्त अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिलने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
////यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है///

किसी व्यक्ति को चार्जशीट में आरोपी नहीं बनाया जाना और अदालत द्वारा उसे दोषमुक्त घोषित किया जाना एक ही बात नहीं है।
///इसलिए इस मामले में विधि-सम्मत शब्दावली यही होगी कि—///
“जांच में आरोपी नहीं बनाया गया और गवाह बनाया गया।”
अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
क्या मंदिर के आभूषण भी चोरी हुए?
चढ़ावे के साथ मंदिर के कीमती आभूषण गायब होने को लेकर भी विभिन्न चर्चाएं सामने आई थीं।
उपलब्ध जांच-संबंधी रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने मंदिर के कीमती आभूषण गायब होने की बात को खारिज किया है।

इसलिए वर्तमान रिपोर्ट में आभूषणों की कथित चोरी को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

///मामला केवल चोरी का नहीं, व्यवस्था और जवाबदेही का भी सवाल///

चार्जशीट में सामने आए CCTV और अन्य साक्ष्यों ने चढ़ावा-गणना की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

मामले से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न हैं—
दान की रकम की गिनती की प्रक्रिया कितनी सुरक्षित थी?
गणना कक्ष में प्रवेश और निकासी की निगरानी कैसी थी?
CCTV निगरानी के बावजूद कथित घटनाएं लंबे समय तक कैसे होती रहीं?

//नकदी बैंक तक पहुंचने से पहले उसकी सुरक्षा के कितने स्तर थे?//

जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किस स्तर तक किया गया?

इन सवालों का उत्तर किसी जाति, धर्म या समुदाय को दोषी ठहराकर नहीं, बल्कि दस्तावेज, साक्ष्य, जवाबदेही और कानून के आधार पर तलाशा जाना चाहिए।

///मूकनायक की दृष्टि:////

**** सवाल व्यक्ति से नहीं, व्यवस्था से****

इस पूरे प्रकरण को किसी जाति, धर्म अथवा सामाजिक वर्ग के विरुद्ध खड़ा करना उचित नहीं होगा।

यदि किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप है तो उसका मूल्यांकन उसके कथित कृत्य और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि उसकी जाति, धर्म या सामाजिक पहचान के आधार पर।

इसी प्रकार यदि जांच एजेंसी को किसी व्यक्ति के विरुद्ध अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिले हैं तो उसे बिना आधार आरोपी बनाना भी न्यायसंगत पत्रकारिता नहीं होगी

////सच किसी वर्ग का दुश्मन नहीं होता।///

सार्वजनिक महत्व के ऐसे मामलों में पत्रकारिता का दायित्व है कि वह जांच एजेंसी के दावों, दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों को जनता के सामने रखे और न्यायिक प्रक्रिया को अपना काम करने दे।

एक नजर में पूरा मामला
73,480 — चार्जशीट के पन्ने
4 — चार्जशीट से भरे बड़े बक्से
105 — CCTV में चिन्हित कथित घटनाएं
8 — चार्जशीट में आरोपित व्यक्ति
173 — गवाहों के बयान
₹79.85 लाख — रिपोर्टों के अनुसार नकद बरामदगी
करीब 3,300 — जांच में सामने आए मोबाइल संदेश
3 वरिष्ठ ट्रस्ट पदाधिकारी — आरोपी नहीं, गवाह
अंतिम कानूनी स्थिति
यह रिपोर्ट पुलिस/जांच एजेंसी द्वारा अदालत में दाखिल आरोपपत्र तथा उससे संबंधित प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है।
चार्जशीट में लगाए गए आरोप न्यायालय में सिद्ध होना अभी बाकी हैं।

किसी भी आरोपित को न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले उसे अपराधी कहना विधिक रूप से उचित नहीं है।

मामले में अंतिम सत्य और दोष-दोषमुक्ति का निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा।

मूकनायक
न पक्ष में, न विपक्ष में—तथ्यों के पक्ष में।

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