Tuesday, September 29, 2026
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पुलिस हिरासत में युवक की मौत पर उठे गंभीर सवाल,परिजनों ने लगाए मारपीट के आरोप,

पुलिस हिरासत में युवक की मौत पर उठे गंभीर सवाल,परिजनों ने लगाए मारपीट के आरोप,

//// निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग; प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की अपील/////

मूकनायक

कमलेश लवहात्रै
छत्तीसगढ़ प्रभारी

जांजगीर-चांपा/चांपा। चांपा थाना क्षेत्र के मेहंदीपारा निवासी 30 वर्षीय शिव सहिस की पुलिस हिरासत में मौत का मामला सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट किए जाने तथा उपचार में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, घटना को लेकर सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

   परिजनों के अनुसार, शिव सहिस को 9 सितंबर 2026 को आबकारी अधिनियम के एक मामले में चांपा पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। परिवार का कहना है कि उसकी पत्नी और बच्चे उस दिन थाने में मौजूद थे और उन्होंने पुलिस से या तो कानूनी प्रक्रिया के तहत शिव को छोड़ने अथवा न्यायालय/मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने का आग्रह किया था।

//// परिजनों के अनुसार उन्हें अगले दिन न्यायालय में पेश करने की बात कही गई, जिसके बाद वे घर लौट गए।////

परिवार का आरोप है कि उसी शाम जब पत्नी और बच्चे भोजन लेकर थाने पहुंचे, तब बच्चे ने शिव को कथित रूप से बंदीगृह के दरवाजों के बीच हाथों को बांधे हुए देखा। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके साथ मारपीट की जा रही थी। परिवार के अनुसार शिव ने अपनी पत्नी से भय व्यक्त करते हुए मदद की गुहार भी लगाई थी।
परिजनों के मुताबिक, 10 सितंबर की सुबह पुलिस की ओर से परिवार को शिव की तबीयत खराब होने और जिला अस्पताल जांजगीर में भर्ती कराए जाने की सूचना दी गई। परिवार अस्पताल पहुंचा तो शिव को मृत पाया गया। परिजनों ने उसके शरीर पर चोट एवं खून के निशान होने का आरोप लगाते हुए घटना की गंभीर जांच की मांग की है।
परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि शिव की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे पहले एक निजी चिकित्सा केंद्र ले जाया गया था, जहां कथित रूप से उसे मृत घोषित कर दिया गया और बाद में जिला अस्पताल भेजे जाने की बात सामने आई। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
परिजनों ने कथित तौर पर शव के अंतिम संस्कार को लेकर पुलिस द्वारा दबाव बनाए जाने तथा परिवार को धमकाए जाने के भी आरोप लगाए हैं। मामले में पीड़ित परिवार के समर्थन में पहुंचे कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस के व्यवहार और कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना और उसका रिकॉर्ड पर लिया जाना महत्वपूर्ण होगा।

////मजिस्ट्रियल जांच और मेडिकल रिपोर्ट पर निगाह/////

घटना के बाद मजिस्ट्रियल जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, थाना सीसीटीवी फुटेज, पुलिस डायरी तथा हिरासत से संबंधित दस्तावेज इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इसलिए इन सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग उठ रही है।

परिजनों का कहना है कि यदि हिरासत के दौरान किसी प्रकार की मारपीट या मानवाधिकार उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यदि पुलिसकर्मियों की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई है तो जांच के माध्यम से यह तथ्य भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए।

पूर्व की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
जांजगीर-चांपा जिले में पूर्व में भी पुलिस हिरासत में मौत से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों का उल्लेख करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हिरासत में लिए गए प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य और पुलिस प्रशासन की होती है। इसलिए किसी भी हिरासत में मौत के मामले में जांच ऐसी होनी चाहिए जिससे पीड़ित परिवार को निष्पक्षता का भरोसा मिल सके।

////प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की अपील////

शिव सहिस की मौत के मामले में सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य शासन तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा वरिष्ठ स्तर के अधिकारी से कराई जाए, सभी संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए तथा जांच पूरी होने तक पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
साथ ही मृतक के परिवार को नियमानुसार उचित आर्थिक सहायता एवं कानूनी सहयोग उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।
यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा का विषय नहीं है, बल्कि पुलिस हिरासत में नागरिकों की सुरक्षा, मानवाधिकार और कानून के शासन पर भरोसे से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा होती है कि हिरासत में लिए गए प्रत्येक व्यक्ति के साथ कानून के अनुरूप और मानवीय व्यवहार किया जाए। इसलिए शिव सहिस की मौत के वास्तविक कारणों का निष्पक्ष रूप से सामने आना और दोषी पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होना आवश्यक है।
पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों की अपील है कि इस मामले को राजनीतिक विवाद के बजाय मानवाधिकार और न्याय के प्रश्न के रूप में देखा जाए तथा शासन-प्रशासन संवेदनशीलता के साथ तत्काल सकारात्मक कार्रवाई करे।

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