मूकनायक/ दुर्गेन्द्र सम्राट स्टेट सब एडिटर संतकबीरनगर/ उत्तर प्रदेश
संतकबीरनगर। थाना दुधारा क्षेत्र में पत्रकार राहुल त्रिपाठी को पेट्रोल पंप से कथित रूप से पुलिस द्वारा थाने ले जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पत्र के अनुसार, 12 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे राहुल त्रिपाठी दुधारा थाना क्षेत्र स्थित एक पेट्रोल पंप पर मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान थाना दुधारा के पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उन्हें मोटरसाइकिल पर बैठाकर थाने ले गए। पत्रकार का आरोप है कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि किस मामले में और किस कानूनी अधिकार के तहत थाने ले जाया जा रहा है।
मामले में पुलिसकर्मियों मोतीलाल, हरिप्रसाद और संजय प्रसाद की भूमिका की जांच की मांग की गई है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि पत्रकार का मोबाइल फोन पुलिसकर्मियों ने कब्जे में लिया तथा उनके पास मौजूद करीब ₹6,400 रुपये कथित रूप से कब्जे में रखने का आरोप है। इसके अलावा पत्रकार की ओर से ₹20,000 रुपये रिश्वत मांगने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। आरोप है कि रिश्वत की मांग पूरी न करने पर कथित तौर पर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। जांच में उठाए गए कई गंभीर सवाल राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ ने मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि राहुल त्रिपाठी को किस कानूनी प्रावधान के तहत थाने लाया गया, क्या उन्हें गिरफ्तार किया गया था, क्या कोई वैध नोटिस या आदेश दिया गया था और पुलिसकर्मियों ने अपनी शक्तियों का नियमानुसार प्रयोग किया या नहीं। पत्र में ₹6,400 रुपये और ₹20,000 रुपये की कथित मांग, मोबाइल फोन कब्जे में लेने, पुलिस वाहन एवं पुलिसकर्मियों की गतिविधियों तथा पेट्रोल पंप और थाना परिसर की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की मांग की गई है। संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की जांच थाना दुधारा से बाहर किसी वरिष्ठ एवं स्वतंत्र पुलिस अधिकारी से कराई जाए। आरोप सत्य पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ BNS, BNSS, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही पत्रकार राहुल त्रिपाठी और उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जांच की प्रगति एवं अंतिम कार्रवाई से शिकायतकर्ता को लिखित रूप से अवगत कराने की मांग भी की गई है। फिलहाल पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही उनकी पुष्टि हो सकेगी।

