Monday, September 28, 2026
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तिलौली में अपोलो अल्ट्रासाउंड सेंटर की व्यवस्था पर उठे सवाल, डॉक्टर की मौजूदगी से लेकर PCPNDT रिकॉर्ड तक जांच की मांग

इंद्रसेन गौतम/सब जिला ब्यूरो चीफ सिद्धार्थनगर/उत्तर प्रदेश

सिद्धार्थनगर। तिलौली स्वास्थ्य केंद्र के निकट संचालित बताए जा रहे अपोलो क्लिनिक एवं अल्ट्रासाउंड सेंटर को लेकर एक शिकायत ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता अभिषेक कुमार उर्फ इंद्रसेन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिद्धार्थनगर को शिकायत देकर सेंटर के पंजीकरण, अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर/रेडियोलॉजिस्ट की वास्तविक मौजूदगी, उनकी योग्यता, शुल्क और PCPNDT नियमों के अनुपालन की जांच कराने की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, 12 सितंबर 2026 को पेट में दर्द होने पर शिकायतकर्ता तिलौली स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था। वहां चिकित्सक द्वारा अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दिए जाने के बाद उसने नजदीक स्थित बताए जा रहे अपोलो क्लिनिक एवं अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच कराई। शिकायतकर्ता का कहना है कि अल्ट्रासाउंड के लिए उससे 500 रुपये शुल्क लिया गया, लेकिन यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी कि जांच किस डॉक्टर/रेडियोलॉजिस्ट ने की और संबंधित चिकित्सक की योग्यता एवं पंजीकरण क्या है।

सबसे बड़ा सवाल—अल्ट्रासाउंड के समय डॉक्टर कहां थे?

शिकायत में स्वास्थ्य विभाग से सबसे महत्वपूर्ण रूप से यह सत्यापित कराने की मांग की गई है कि जिस डॉक्टर/रेडियोलॉजिस्ट के नाम पर सेंटर का पंजीकरण या संचालन किया जा रहा है, 12 सितंबर को अल्ट्रासाउंड के समय वह चिकित्सक वास्तव में सेंटर पर मौजूद थे या नहीं।

शिकायतकर्ता ने डॉक्टर की उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी एवं विजिट रिकॉर्ड, अपॉइंटमेंट रिकॉर्ड, मरीज रजिस्टर, Form-F तथा अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि संबंधित डॉक्टर उस समय सेंटर पर मौजूद नहीं थे तो अल्ट्रासाउंड किस व्यक्ति ने किया और किसकी निगरानी में किया गया।

शपथपत्र और जमीनी हकीकत के मिलान की मांग

शिकायत में सेंटर के PCPNDT पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों और संबंधित डॉक्टर/रेडियोलॉजिस्ट द्वारा प्रस्तुत किए गए शपथपत्र की भी जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि शपथपत्र में डॉक्टर द्वारा सेंटर पर अपनी उपस्थिति, कार्य के समय और अल्ट्रासाउंड करने अथवा पर्यवेक्षण से संबंधित किए गए दावों का मौके के वास्तविक रिकॉर्ड से मिलान कराया जाए। यदि दस्तावेजों में कुछ और और मौके पर व्यवस्था कुछ और मिलती है तो इसकी भी जांच की जाए।

CCTV से लेकर रिकॉर्ड तक जांच की मांग

शिकायत में सेंटर के CCTV फुटेज, डॉक्टर की विजिट संबंधी रिकॉर्ड, मरीज रजिस्टर, Form-F, अल्ट्रासाउंड रिकॉर्ड, मशीन का विवरण और PCPNDT से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने डॉक्टर की डिग्री, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और रेडियोलॉजी संबंधी योग्यता का संबंधित प्राधिकरण से स्वतंत्र सत्यापन कराने की भी मांग की है। इसके अलावा शिकायत में डॉक्टर के मोबाइल नंबर की CDR/लोकेशन की जांच का अनुरोध भी किया गया है, ताकि आवश्यकता होने पर संबंधित दिन सेंटर पर उनकी वास्तविक मौजूदगी का सत्यापन किया जा सके।

500 रुपये शुल्क की भी जांच की मांग

शिकायत में 12 सितंबर को लिए गए 500 रुपये शुल्क की रसीद, शुल्क रजिस्टर और अन्य मरीजों से लिए जा रहे शुल्क की भी जांच कराने को कहा गया है। साथ ही शिकायतकर्ता की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में अधिकृत डॉक्टर/रेडियोलॉजिस्ट का नाम एवं पंजीकरण संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होने अथवा न होने की भी जांच की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने कहा—कागजों से नहीं, मौके पर हो वास्तविक सत्यापन

शिकायतकर्ता का कहना है कि मामला मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण केवल कागजी दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। सेंटर पर अचानक निरीक्षण कर डॉक्टर की वास्तविक उपस्थिति, अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया, रिकॉर्ड और PCPNDT नियमों के अनुपालन का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में किसी नियम का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित संचालक अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा शिकायतकर्ता को जांच की कार्रवाई से अवगत कराया जाए।

अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच में कागजों में दर्ज व्यवस्था तथा मौके की वास्तविक स्थिति के बीच कोई अंतर सामने आता है या नहीं।

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