28 गांवों में सामाजिक संपर्क बढ़ाने से लेकर जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग तक, बाबा साहब के विचारों से प्रेरित होकर लगातार कर रहे सामाजिक कार्य
मूकनायक/ रिपोर्टर धर्मवीर गौतम
हिंडौन सिटी/ करौली/राजस्थान
हिण्डौन सिटी। समाज में बदलाव केवल बड़े आंदोलनों से ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सामाजिक प्रयासों से भी शुरू होता है। जब कोई युवा अपने आसपास के लोगों की जरूरतों को समझते हुए शिक्षा, सामाजिक सहयोग और जागरूकता के क्षेत्र में लगातार काम करता है, तो उसका प्रयास धीरे-धीरे व्यापक सामाजिक सरोकार का रूप ले सकता है। हिण्डौन क्षेत्र के खेड़लियान का पुरा निवासी लवकुश जाटव भी कम उम्र से सामाजिक गतिविधियों से जुड़े ऐसे ही युवाओं में शामिल हैं, जो समाज के बीच रहकर विभिन्न स्तरों पर सहयोग और सामाजिक भागीदारी की पहल कर रहे हैं।
लवकुश जाटव की सामाजिक सक्रियता के पीछे डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को महत्वपूर्ण प्रेरणा माना जाता है। बचपन से ही बाबा साहब के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने सामाजिक समानता, शिक्षा और समाज के सामूहिक विकास को अपने सामाजिक प्रयासों का आधार बनाया। समय के साथ बहुजन समाज के लोगों से उनका संपर्क बढ़ता गया और सामाजिक बैठकों एवं सामुदायिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी भी लगातार बनी रही।
शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम मानकर काम
लवकुश जाटव के सामाजिक प्रयासों में आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ना प्रमुख रूप से शामिल है। ऐसे बच्चों की पढ़ाई में सहयोग के लिए स्टेशनरी उपलब्ध करवाने, जरूरतमंद बच्चों को कपड़े वितरित करने और शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने जैसे कार्य उनके द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आती है।
उनका मानना है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसी सोच के तहत जरूरतमंद विद्यार्थियों तक शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने और उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखने के प्रयास किए जाते हैं।
सामाजिक बैठकों में सक्रिय भागीदारी
समाज के स्तर पर होने वाली बैठकों और सामाजिक सहयोग कार्यक्रमों में भी लवकुश जाटव की भागीदारी रही है। इन बैठकों के माध्यम से सामाजिक समस्याओं पर चर्चा, आपसी संवाद और समाज के लोगों को एक मंच पर लाने की दिशा में प्रयास किए जाते हैं।
उनकी सामाजिक सक्रियता केवल अपने गांव तक सीमित रखने के बजाय आसपास के क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने पर भी केंद्रित रही है। जाटव समाज के 28 गांवों में संपर्क स्थापित करने के प्रयासों के जरिए सामाजिक संवाद को मजबूत करने और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
समाज की प्रतिभाओं को मंच देने की पहल
किसी भी समाज के विकास में शिक्षा के साथ-साथ प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें अवसर देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लवकुश जाटव द्वारा समाज के प्रतिभाशाली बच्चों और युवाओं को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें मंच उपलब्ध कराने की दिशा में भी सहयोग किया जाता है।
सामाजिक कार्यक्रमों में प्रतिभाओं को सम्मान और पहचान मिलने से बच्चों एवं युवाओं में आगे बढ़ने की प्रेरणा पैदा होती है। इसी उद्देश्य से समाज की प्रतिभाओं को सामने लाने के प्रयास उनकी सामाजिक गतिविधियों का एक हिस्सा रहे हैं।
बाबा साहब के विचारों को सामाजिक जीवन से जोड़ने का प्रयास
लवकुश जाटव की सामाजिक यात्रा को समझने के लिए उनके विचारों की प्रेरणा को भी देखना जरूरी है। डॉ. आंबेडकर ने शिक्षा, समानता और सामाजिक अधिकारों को सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में रखा था। लवकुश जाटव इन्हीं विचारों से प्रेरणा लेकर शिक्षा और सामाजिक सहयोग को समाज के बीच ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।
उनकी गतिविधियों में जरूरतमंद परिवारों की सहायता, बच्चों को शिक्षा से जोड़ना, सामाजिक बैठकों में भागीदारी और विभिन्न गांवों के लोगों के बीच संपर्क स्थापित करना शामिल है।
आगे भी सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहने की दिशा
लवकुश जाटव का कहना है कि समाज के विकास के लिए केवल व्यक्तिगत सफलता पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामूहिक रूप से आगे बढ़ना जरूरी है। विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और युवाओं को सामाजिक रूप से जागरूक करना लंबे समय में समाज के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
खेड़लियान का पुरा से शुरू हुई उनकी सामाजिक सक्रियता अब आसपास के गांवों तक संपर्क बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में शिक्षा, सामाजिक सहयोग और समाज की प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने से जुड़े प्रयासों को और विस्तार देने की दिशा में काम जारी रखने की बात उनके स्तर से कही गई है।

