Monday, September 28, 2026
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इटवा में राकेश यादव के आगे नतमस्तक हुआ स्वास्थ्य महकमा,अस्पताल सील, एफआईआर, सील काटने का वीडियो वायरल, फिर मुकदमा—फिर भी कार्रवाई की रफ्तार पर ब्रेक!

रजिस्ट्रेशन किसी और के नाम, हर मामले में राकेश यादव की कथित भूमिका पर सवाल—सीडीआर जांच की मांग

50 डिग्रियों और स्टाम्प पेपर मिलने के दावे की जांच तक नहीं! अब नए रजिस्ट्रेशन की कवायद की खबर ने बढ़ाई हलचल

शिकायतकर्ता हाईकोर्ट की चौखट
पर – स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रिकॉर्ड के साथ देना पड़ सकता है जवाब

मूकनायक/ दुर्गेन्द्र सम्राट स्टेट सब एडिटर सिद्धार्थनगर/ उत्तर प्रदेश

सिद्धार्थनगर। इटवा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और उसके बाद कथित सुस्ती को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राकेश यादव से जुड़े बताए जा रहे कई स्वास्थ्य संस्थानों के मामलों में जांच, सील, नोटिस और मुकदमे जैसी कार्रवाई तो हुई, लेकिन कई गंभीर बिंदुओं पर अब तक निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई

जनता सेवा अस्पताल सील हुआ, एफआईआर दर्ज हुई और कथित रूप से सील काटे जाने का वीडियो वायरल होने के बाद पुनः मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्रवाई की अगली कड़ी अब भी सवालों के घेरे में है

*50 डिग्री और स्टाम्प पेपर मिलने का दावा—जांच कहां अटकी?*

मामले में एक और गंभीर दावा सामने आया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक पूर्व में अस्पताल से संबंधित परिसर से करीब 50 डिग्रियां और स्टाम्प पेपर बरामद/मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन अभी तक इन दस्तावेजों की वास्तविकता, स्रोत, स्वामित्व और इस्तेमाल की वैधानिकता की स्पष्ट जांच नहीं हुई है

यदि ये दस्तावेज वास्तव में जांच एजेंसी अथवा किसी सक्षम अधिकारी के कब्जे में आए थे, तो शिकायतकर्ता की मांग है कि उनकी प्रामाणिकता, जारी करने वाली संस्थाओं, संबंधित व्यक्तियों तथा संभावित उपयोग की विधिवत जांच कराई जाए

*सूत्रों का दावा—डिग्रियां वापस देने की कवायद?*

इस बीच सूत्रों के हवाले से एक और गंभीर दावा सामने आया है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी कथित रूप से इन डिग्रियों को वापस देने की कवायद में लगे हैं

*सूत्रों के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है लेकिन यदि सरकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज वास्तव में विभाग के कब्जे में हैं, तो उन्हें बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए वापस किए जाने की स्थिति में जिम्मेदारी और कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं*

शिकायतकर्ता की मांग है कि इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखते हुए पहले उनकी वैधानिक जांच और सत्यापन कराया जाए तथा आवश्यकता होने पर संबंधित जांच एजेंसी को सौंपा जाए।
रजिस्ट्रेशन किसी और के नाम, फिर राकेश यादव की कथित भूमिका क्या?
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी अस्पताल या संस्थान का रजिस्ट्रेशन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर है, तो विभिन्न मामलों में राकेश यादव की कथित भूमिका की भी जांच होनी चाहिए

इसीलिए शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वास्तविक संचालन, प्रबंधन, आर्थिक लेन-देन, कर्मचारियों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बीच संपर्कों की जांच की जाए। कानूनन अनुमति और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के तहत सीडीआर समेत उपलब्ध वैधानिक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच से भी पूरे मामले की कड़ियां स्पष्ट हो सकती हैं

*सूत्रों का दावा सीएमओ कार्यालय के चक्कर और नए नाम से रजिस्ट्रेशन का दावा*

सूत्रों के मुताबिक राकेश यादव लगातार सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रहा है और कथित रूप से अस्पताल का नाम बदलकर नए नाम से पुनः रजिस्ट्रेशन कराने की कवायद में लगा है

इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है ऐसे में सवाल उठता है कि यदि कोई नया आवेदन किया गया है तो उसमें पुराने अस्पताल, पुराने संचालकों, पूर्व की सील, एफआईआर और लंबित जांच का उल्लेख किस रूप में किया गया है?

*लक्ष्मी, पूर्वा और पीसी डायग्नोस्टिक सेंटर भी सवालों में*

लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर एवं सीटी स्कैन सेंटर की जांच में डॉक्टर, एनओसी और अन्य अभिलेखों से जुड़ी कथित कमियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है

खुनियाव के बढ़या स्वास्थ्य केंद्र स्थित पूर्वा डायग्नोस्टिक सेंटर को लेकर जांच और नोटिस का मामला सामने आया था शिकायतकर्ता का आरोप है कि नोटिस के जवाब के बाद कार्रवाई ठंडी पड़ गई
वहीं बेवा स्थित पीसी डायग्नोस्टिक सेंटर के संबंध में भी जांच और नोटिस के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने का आरोप है

*अब हाईकोर्ट में उठेंगे सारे सवाल*
*इन तमाम मामलों को लेकर*

शिकायतकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जनता सेवा अस्पताल की सील, एफआईआर, कथित सील काटने का वीडियो, लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड एवं सीटी स्कैन की जांच, पूर्वा व पीसी डायग्नोस्टिक सेंटर के नोटिस, एमए फार्मा, कथित पुनः रजिस्ट्रेशन तथा 50 डिग्रियों और स्टाम्प पेपर से जुड़े दावों के दस्तावेज न्यायालय के समक्ष रखे जाएंगे

यदि दस्तावेज वापस करने अथवा नए रजिस्ट्रेशन से जुड़े दावे सही पाए जाते हैं, तो शिकायतकर्ता की मांग है कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया की भी स्वतंत्र जांच हो

*अब असली सवाल—डिग्रियां किसकी, स्टाम्प पेपर किसके और जांच क्यों नहीं?*

पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि यदि 50 डिग्रियां और स्टाम्प पेपर वास्तव में मिले थे, तो उनकी सत्यता की जांच अब तक क्यों नहीं हुई? और यदि वे जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं तो उन्हें सुरक्षित रखने तथा विधिक प्रक्रिया के तहत जांच कराने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?

हाईकोर्ट में मामला पहुंचने की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग को अपने रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट करना पड़ सकता है कि दस्तावेज कब मिले, किसके कब्जे में रहे, उनकी जांच किसने की, क्या रिपोर्ट बनी, उन्हें सुरक्षित रखने की क्या कार्रवाई हुई और यदि कोई नया रजिस्ट्रेशन आवेदन हुआ तो उसकी जांच किस आधार पर की गई।

अब मामला केवल एक अस्पताल की कार्रवाई तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि रजिस्ट्रेशन, वास्तविक संचालन, दस्तावेजों, अधिकारियों की भूमिका और विभागीय कार्रवाई की पूरी कड़ी जांच के दायरे में लाने की मांग तक पहुंच गया है।

Durgendra Samrat
Durgendra Samrathttp://www.mooknayaknews.com
Durgendra Samrat मीडिया जगत का एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित नाम हैं वर्तमान में वे Mooknayak News में State Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। राजनीति, चुनाव, व्यवसाय, सामाजिक मुद्दों, अपराध और जमीनी सरोकारों से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ और मजबूत पकड़ है निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते है।
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