इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल शादी, धार्मिक कार्यक्रमों या किसी भी तरह की हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक शस्त्र लाइसेंसधारी को खरीदे गए और इस्तेमाल किए गए कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। रिकॉर्ड न रखने पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अखिलेश कुमार की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
मामले में जांच के दौरान सामने आया कि याचिकाकर्ता ने कुल 857 कारतूस खरीदे थे, लेकिन वह केवल 57 जिंदा कारतूस और 33 खाली खोखे ही प्रस्तुत कर सका। याचिकाकर्ता ने शेष कारतूसों के उपयोग को शादी, छठ पूजा व अन्य कार्य क्रमों में हथियारों की टेस्टिंग से जुड़ा बताया, लेकिन इसके समर्थन में कोई रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई मौलिक अधिकार नहीं बल्कि शर्तों के आधार पर दी गई सुविधा है। हाईकोर्ट ने लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए लाइसेंस निरस्त करने के आदेश को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी।

