Tuesday, September 29, 2026
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विश्व आदिवासी दिवस पर गरीबी, बेरोजगारी और अन्याय से मुक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण का आह्वान

फुले-अंबेडकर विचार मंच के द्वितीय स्थापना समारोह एवं संगोष्ठी में संविधान, सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दों पर हुआ विचार-विमर्श

रायपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 9 अगस्त 2026 को राजधानी रायपुर के राजेंद्र नगर स्थित बौद्ध विहार हॉल में फुले-अंबेडकर विचार मंच की ओर से संगठन का द्वितीय स्थापना समारोह एवं संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष जे.पी. बौद्ध ने की। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, विचारक, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा भारत के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल ऋषिकर भारती, इंजीनियर टी.आर. खूंटे, पूर्व न्यायाधीश एल.पी. मात्रे, महाप्रबंधक संदीप केशकर, कृषि विभाग के पूर्व उपसंचालक एल.पी. गायकवाड़, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता विशाखा बौद्ध, अधिवक्ता भंजन जांगड़े, जातीय उन्मूलन संगठन के तुहीन देव, मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के प्रदेश महासचिव प्रेम मानिकपुरी तथा रिपब्लिकन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश मेश्राम सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

संस्था के अध्यक्ष जे.पी. बौद्ध ने मंच के द्वितीय स्थापना वर्ष पर उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर लगातार संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहा है।

मुख्य वक्ता गोपाल ऋषिकर भारती ने कहा कि 27 जून 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम 20 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था। उन्होंने बताया कि इन मांगों में संविधान की सुरक्षा एवं सम्मान, संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन, ओबीसी जनगणना के लिए पृथक प्रावधान और आदिवासी कोड सहित सामाजिक न्याय से जुड़े विषय शामिल थे।

भारती ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सरकार और समाज के सभी वर्गों से छत्तीसगढ़ को गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक अन्याय से मुक्त बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी क्षमता के अनुसार समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने सामाजिक भेदभाव, जातिगत असमानता, लैंगिक भेदभाव, सांप्रदायिकता और छुआछूत जैसी सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि भेदभाव और अन्याय जैसी प्रवृत्तियों के विरुद्ध संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ना होना चाहिए।

संगोष्ठी में तथागत बुद्ध, सम्राट अशोक, संत कबीर, गुरु घासीदास, बिरसा मुंडा, महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, छत्रपति साहूजी महाराज, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित विभिन्न महापुरुषों के सामाजिक सुधार एवं समानता संबंधी विचारों का उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की भावना को मजबूत करना लोकतांत्रिक समाज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

कार्यक्रम में महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक असमानता तथा महिलाओं और वंचित वर्गों से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इन चुनौतियों के समाधान के लिए जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और लोकतांत्रिक संवाद को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

गोपाल ऋषिकर भारती ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक जनभागीदारी को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक माध्यमों से व्यापक जनजागरूकता और सामाजिक आंदोलन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

संगोष्ठी के अंत में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने संविधान की भावना के अनुरूप समानता, सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और मानव गरिमा को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम संबंधी जानकारी : गोपाल ऋषिकर भारती द्वारा उपलब्ध कराई गई।

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