मक्का-मदीना के मुक़द्दस सफ़र से लौटे हाजियों का बिलासपुर स्टेशन पर शानदार इस्तक़बाल
मूकनायक / दाऊद खान
बिलासपुर। मक्का-मदीना मुनव्वरा के मुक़द्दस सफ़र से उमरा की सआदत हासिल कर लौटे हाजी मोहम्मद नबी खान एवं हज्जन नाज़रा बेगम का बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर परिजनों, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों एवं शुभचिंतकों ने गर्मजोशी के साथ शानदार इस्तक़बाल किया। इस दौरान स्टेशन पर खुशी और जज़्बाती माहौल देखने को मिला।
हाजियों के इस्तक़बाल के लिए उनके बेटे दाऊद खान, शादाब खान, अल्तमश खान एवं फरदीन खान सहित परिवार के अन्य सदस्य और अज़ीज़ मौजूद रहे। इसी मौके पर दाऊद खान के अज़ीज़ दोस्त एवं शहर के प्रतिष्ठित समाजसेवी अलीम अंसारी भी स्टेशन पहुंचे और हाजी मोहम्मद नबी खान एवं हज्जन नाज़रा बेगम का गर्मजोशी से इस्तक़बाल करते हुए उन्हें उमरा की दिली मुबारकबाद पेश की। मुक़द्दस सफ़र की यादों को साझा करते हुए हाजियों ने कहा कि मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा की फ़ज़ाओं को अल्फ़ाज़ में बयान करना आसान नहीं है। यह ऐसा मुक़द्दस सफ़र है, जिसकी यादें इंसान के दिल में हमेशा के लिए बस जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह दुनिया फ़ना हो जाने वाली है, इसलिए इंसान को जितना जल्द हो सके, अपनी ज़िंदगी में एक बार उस मुक़द्दस सरज़मीन की ज़ियारत ज़रूर करनी चाहिए। मक्का-मदीना की तारीफ़ करते हुए दोनों हाजी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वहां के मंजर को याद करते ही दिल भर आता है, जब भी आंखें बंद होती हैं, वही मुक़द्दस मंजर आंखों के सामने आ जाता है और जब उस सरज़मीन की याद आती है तो आंखों से बेइख़्तियार आंसू छलक पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि मक्का मुकर्रमा में ख़ाना-ए-काबा और मदीना मुनव्वरा में रौज़ा-ए-रसूल की ज़ियारत का एहसास दिल को ऐसी कैफ़ियत से भर देता है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। मुक़द्दस जगहों की फ़ज़ाओं, इबादत के सुकून और वहां बिताए लम्हों की यादें अब भी उनके दिलो-दिमाग़ में ताज़ा हैं। इस अवसर पर समाजसेवी अलीम अंसारी ने कहा कि मक्का-मदीना की ज़ियारत हर मुसलमान के लिए बड़ी नेमत और सौभाग्य की बात है। उन्होंने हाजी मोहम्मद नबी खान एवं हज्जन नाज़रा बेगम को उमरा की दिली मुबारकबाद देते हुए दुआ की कि अल्लाह तआला उनके उमरा को क़ुबूल फरमाए, उनकी इबादतों को मंज़ूर करे और उन्हें सेहत, सलामती एवं बरकत वाली ज़िंदगी अता फरमाए। इस दौरान माहताब आलम, मोहम्मद ताजुद्दीन सहित बड़ी संख्या में परिवारजन, अज़ीज़-दोस्त एवं शुभचिंतक मौजूद रहे। सभी ने हाजियों का फूल-मालाओं से इस्तक़बाल करते हुए उन्हें उमरा की मुबारकबाद दी और उनके लिए ख़ैर, बरकत एवं सलामती की दुआ की।
हाजियों के इस्तक़बाल के दौरान पूरे स्टेशन परिसर में मोहब्बत, भाईचारे और ख़ुशी की खूबसूरत फ़िज़ा देखने को मिली।


