Tuesday, September 29, 2026
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पेसा और वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए टास्क फोर्स की पहली बैठक

राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति करेगी विभिन्न विभागों के नियमों का समन्वय, जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को किया जाएगा सक्रिय

रायपुर, 5 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय भवन में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) एवं पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स की शीर्ष समिति की पहली बैठक आयोजित हुई। बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के बेहतर समन्वय, ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने तथा आदिवासी समुदायों के समग्र एवं सतत विकास के लिए व्यापक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन दोनों महत्वपूर्ण कानूनों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की बाधा न आने पाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी हुई है। ऐसे में उनकी परंपराओं, संस्कृति, अधिकारों और आजीविका को सुरक्षित रखते हुए विकास का ऐसा मॉडल तैयार किया जाना आवश्यक है, जो पूरे देश के लिए उदाहरण बन सके। उन्होंने कहा कि पेसा कानून ग्राम स्वशासन को मजबूत करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय समुदायों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा, ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार, स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, रोजगार के अवसरों में वृद्धि तथा संतुलित एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने में पेसा कानून की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार चाहती है कि विकास और जनभागीदारी दोनों समान गति से आगे बढ़ें।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) और पेसा कानून (पेसा) एक-दूसरे के पूरक हैं। इन दोनों कानूनों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर ही अनुसूचित क्षेत्रों में अपेक्षित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं का क्रियान्वयन एकीकृत दृष्टिकोण से किया जाए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समयबद्ध तरीके से सभी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

बैठक में मुख्यमंत्री ने जनजागरूकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि पेसा कानून को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। लोगों तक सही और तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाने के लिए अभियान चलाए जाएं तथा किसी भी प्रकार की भ्रांतियों और अफवाहों का प्रभावी निराकरण किया जाए।

बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022 के अंतर्गत पेसा कानून के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत प्राप्त, निराकृत एवं लंबित व्यक्तिगत तथा सामुदायिक दावों की समीक्षा भी की गई। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) की मान्यता, संरक्षण एवं प्रबंधन की प्रगति तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

विभिन्न विभागों के नियमों का होगा समन्वय

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पेसा कानून के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा बनाए गए नियमों एवं प्रक्रियाओं में बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति का गठन किया जाए। यह समिति विभिन्न विभागों के नियमों के अभिसरण, समयबद्ध कार्ययोजना के निर्माण तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करेगी। समिति में संबंधित विभागों के मंत्री एवं सचिव सदस्य होंगे।

उन्होंने जिला स्तर पर पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए। इन समितियों के माध्यम से ग्राम सभाओं को अधिक सशक्त बनाया जाएगा तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक नीलकंठ नेताम तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, अपर मुख्य सचिव (वन एवं जलवायु परिवर्तन) मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास सोनमणि बोरा, सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन शम्मी आबदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (पीसीसीएफ) अरुण पाण्डेय, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रियंका ऋचा महोबिया सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

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