मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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गृहणी केवल घर की चारदीवारी संभालने वाली स्त्री ही नहीं, बल्कि वह पूरे परिवार को एक सूत्र में बांधने वाली अदृश्य शक्ति है। बिना किसी वेतन या छुट्टी के, वह चौबीसों घंटे परिवार की उन्नति और खुशहाली के लिए समर्पित रहती है। एक मजबूत इमारत के लिए उसकी नींव का मजबूत होना जरूरी है, जो दिखाई नहीं देती। ठीक उसी तरह, गृहणी परिवार की वह अदृश्य नींव है, जिस पर पूरे परिवार का भविष्य टिकता है। वह घर के हर सदस्य की शारीरिक और मानसिक जरूरतों का ध्यान रखती है। संकट के समय वह मानसिक संबल बनकर संकटमोचक की भूमिका निभाती है। उसकी उपस्थिति ही पूरे परिवार को सुरक्षा का अहसास कराती है।
गृहणी एक कुशल शिल्पकार है, जो कच्चे पत्थरों जैसे बच्चों को अपने संस्कारों और शिक्षा से तराश कर समाज के लिए बहुमूल्य रत्न बनाती है। वह घर को केवल ईंट-गारे का ढांचा नहीं रहने देती, बल्कि अपनी ममता, त्याग और सूझबूझ से उसे ‘स्वर्ग’ का रूप देती है। वह एक बेहतरीन अर्थशास्त्री भी है, जो सीमित संसाधनों में भी पूरे घर का प्रबंधन और बचत बखूबी करती है। इसीलिए गृहणी का योगदान अमूल्य है, जिसकी तुलना किसी भी सांसारिक धन या पद से नहीं की जा सकती। वह समाज की असली शिल्पकार और शक्ति का अटूट स्तंभ है। परिवार और समाज का यह कर्तव्य है कि वे उसके इस मूक बलिदान को पहचानें और उसे वह सम्मान, प्यार और कृतज्ञता दें, जिसकी वह हकदार है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

