गुरु पूर्णिमा पर कबीर धाम लहरतारा में विश्व वंदनीय पंथ श्री 1008 हुजूर अर्धनाम साहेब ने ताज-पंजा, नामगोष्ठी एवं महंत पद प्रदान किया।
वाराणसी | मूकनायक न्यूज ब्यूरो ।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कबीर पंथ के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र कबीर धाम लहरतारा, काशी में आयोजित भव्य संत समागम एवं दीक्षा समारोह में राजस्थान के लिए गौरवपूर्ण क्षण देखने को मिला। मूकनायक राजस्थान के संपादक श्री रामलाल यादव को विश्व वंदनीय पंथ श्री 1008 हुजूर अर्धनाम साहेब के करकमलों से विधिवत महंत पद की दीक्षा प्रदान की गई। वैदिक एवं पंथीय परंपरा के अनुसार उन्हें ताज-पंजा, नामगोष्ठी तथा आध्यात्मिक दायित्व सौंपे गए।यह सम्मान उन्हें अपने परम पूज्य गुरु श्री महंत देवेन्द्र दास साहेब (कबीर विज्ञान आश्रम, सागवाड़ा) के मार्गदर्शन, तप, साधना और सेवा के परिणामस्वरूप प्राप्त हुआ। कबीर पंथ में महंत पद केवल सम्मान नहीं, बल्कि धर्म, मानवता, सेवा, समता और आध्यात्मिक परंपरा के संरक्षण का दायित्व माना जाता है। रामलाल यादव वर्षों से पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक न्याय, शिक्षा, संविधानिक मूल्यों, मानवाधिकार, समानता तथा वंचित समाज की आवाज़ को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनकी सक्रिय सामाजिक भूमिका और आध्यात्मिक साधना के समन्वय ने उन्हें समाज में विशिष्ट पहचान दिलाई है।महंत पद ग्रहण करने के बाद अब वे आध्यात्मीक क्षैत्र मे महंत रामानंद दास साहेब के नाम से जाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनका जीवन समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहेगा। वे पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों की आवाज़ को मजबूती से उठाने के साथ-साथ सद्गुरु कबीर के सत्य, समता, प्रेम, करुणा, भाईचारे और वैज्ञानिक चिंतन के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य निरंतर करते रहेंगे।उन्होंने यह भी संकल्प व्यक्त किया कि निर्माण प्रक्रियारत विशाल सद्गुरु कबीर गुरुकुल, झडस अरथूना (जिला बाँसवाड़ा) के माध्यम से निर्धन, अनाथ एवं वंचित बच्चों के लिए शिक्षा, संस्कार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा, ताकि शिक्षा के माध्यम से सर्व समाजो में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।इस अवसर पर देशभर से आए संत-महंतों, धर्माचार्यों एवं हजारों श्रद्धालुओं ने उन्हें शुभाशीष प्रदान किया। राजस्थान के बाँसवाड़ा, डूंगरपुर सहित अनेक जिलों से पहुँचे श्रद्धालु भी इस ऐतिहासिक समारोह के साक्षी बने।
मुख्य आकर्षण◆ गुरु पूर्णिमा पर काशी के कबीर धाम लहरतारा में महंत पद की दीक्षा।◆ विश्व वंदनीय पंथ श्री 1008 हुजूर अर्धनाम साहेब के करकमलों से सम्मान।◆ पुज्य गुरु श्री महंत देवेन्द्र दास साहेब के सान्निध्य में आध्यात्मिक साधना का मिला प्रतिफल।◆ अब ‘श्री श्री 108 महंत रामानंद साहेब’ के नाम से होंगे परिचित।◆ पत्रकारिता, समाजसेवा और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम।◆ सद्गुरु कबीर गुरुकुल के माध्यम से शिक्षा एवं मानव सेवा का संकल्प। महंत रामानंद साहेब का विशेष वक्तव्य”महंत पद मेरे लिए सम्मान नहीं, बल्कि समाज, मानवता और सद्गुरु कबीर साहेब के सत्य एवं समता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का आजीवन दायित्व है। पत्रकारिता और आध्यात्मिक सेवा—दोनों माध्यमों से मैं जनहित और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहूँगा। महंत रामानंद साहेब (पूर्व नाम: रामलाल यादव झडस बाँसवाडा )

