जिलाधिकारी को ईमेल भेजकर राहुल सिंह ने तत्काल कार्रवाई की उठाई मांग, जांच पूरी होने तक मेडिकल एजेंसी खोलने व संचालन की अनुमति पर रोक लगाने की मांग
मूकनायक/ रिपोर्टर इंद्रसेन गौतम/- बस्ती उत्तर प्रदेश
सिद्धार्थनगर। इटवा–डुमरियागंज–बढ़नी मार्ग स्थित जनता सेवा हॉस्पिटल परिसर/भवन में संचालित बताई जा रही “एम.ए. फार्मा एवं मेडिकल एजेंसी” के ड्रग लाइसेंस, स्वीकृत परिसर, भवन के पूर्व सील होने तथा थोक औषधि विक्रय की वैधानिकता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में पत्रकार, प्रदेश अध्यक्ष प्रेस क्लब उत्तर प्रदेश एवं संस्थापक/राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ राहुल सिंह ने जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजकर तत्काल उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि उक्त परिसर में पूर्व में सेवा हॉस्पिटल संचालित होने तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा भवन को पूर्व में सील किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि यदि भवन पूर्व में सील किया गया था तो उसी परिसर में वर्तमान में मेडिकल एजेंसी का संचालन किस आधार पर हो रहा है और संबंधित प्रतिष्ठान का ड्रग लाइसेंस किस परिसर के नाम और पते पर जारी किया गया है।
राहुल सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि “एम.ए. फार्मा एवं मेडिकल एजेंसी” का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर ड्रग लाइसेंस में दर्ज स्वीकृत परिसर और मौके पर वास्तविक संचालन स्थल का मिलान कराया जाए। साथ ही लाइसेंस जारी करते समय प्रस्तुत किए गए प्रिमाइसेस प्लान, साइट/लेआउट प्लान, भवन का नक्शा, किरायानामा तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों का भी मौके पर सत्यापन कराया जाए।
शिकायत में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि यदि ड्रग लाइसेंस के लिए प्रस्तुत दस्तावेज वर्तमान संचालन स्थल से अलग किसी अन्य स्थान के पाए जाते हैं तो यह गंभीर मामला हो सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित फर्म के लाइसेंस की वैधानिकता की जांच कर नियमानुसार निलंबन अथवा निरस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
इसके अलावा यह भी जांच की मांग की गई है कि जनता सेवा हॉस्पिटल के भवन को पूर्व में सेवा हॉस्पिटल के रूप में कब, किस आदेश से और किन कारणों से सील किया गया था तथा क्या उक्त भवन की सील हटाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा कोई वैध आदेश जारी किया गया था। इस संबंध में संबंधित सरकारी अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि संबंधित प्रतिष्ठान का ड्रग लाइसेंस थोक औषधि विक्रय के लिए जारी किया गया है तो अस्पताल परिसर में थोक औषधियों के भंडारण एवं विक्रय के लिए परिसर की वैधानिक स्वीकृति तथा निर्धारित मानकों की भी जांच आवश्यक है। औषधियों के भंडारण, कोल्ड-चेन, तापमान नियंत्रण, परिसर के क्षेत्रफल और अन्य आवश्यक मानकों का मौके पर सत्यापन कराने की मांग की गई है।
राहुल सिंह ने जिलाधिकारी से यह भी मांग की है कि जांच के दौरान यदि स्वीकृत परिसर से अलग संचालन, गलत अथवा भ्रामक दस्तावेज, पूर्व में सील किए गए भवन का अवैध उपयोग अथवा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं Drugs and Cosmetics Rules, 1945 के किसी प्रावधान का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित फर्म/संचालक के विरुद्ध नियमानुसार लाइसेंस निलंबन अथवा निरस्तीकरण के साथ प्राथमिकी एवं अभियोजन की कार्रवाई की जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में बिना उचित भौतिक सत्यापन अथवा किसी अधिकारी/कर्मचारी की मिलीभगत से लाइसेंस जारी किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। राहुल सिंह ने जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच टीम गठित कर तत्काल स्थलीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि जांच पूरी होने तक यदि प्रथमदृष्टया लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन अथवा अवैध संचालन पाया जाता है तो जनहित में नियमानुसार मेडिकल एजेंसी के संचालन, औषधि विक्रय एवं भंडारण पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा जांच के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान को खोलने या संचालन की अनुमति देने की कार्रवाई पर भी रोक रखी जाए।
उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले में तत्काल संज्ञान लेकर संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं और जांच की कार्रवाई तथा उसके परिणाम से शिकायतकर्ता को लिखित रूप से अवगत कराया जाए।

