मूकनायक/राम लाल यादव संपादक राजस्थान
उदयपुर/ राजस्थान
उदयपुर 20 जुलाई
संवैधानिक अधिकार जनजागृति संस्थान के पदाधिकारी ने बताया कि आज सभी सामाजिक, राजनीतिक, जनतांत्रिक प्रगतिशील नागरिक व जनसंगठनों ने मिलकर उदयपुर कलेक्ट्री के सामने सामुहिक धरना प्रदर्शन किया जिसमें एडवोकेट राजेश सिंघवी, हिम्मत सेठ, एडवोकेट अरुण व्यास, हिम्मत छांगवाल, चन्द्रदेव ओला, याकुब, गणेशलाल रायकवाल, सुख सम्पत बागड़ी मीणा डॉक्टर कुसुम मेघवाल, मोहम्मद निजाम, मोहम्मद बक्ष, एडवोकेट नेताराम सोनेल, ओमप्रकाश मेघवाल, हिरालाल सालवी, अनिल पणोर, मोहनलाल सालवी, राधाकिशन सालवी, रानू सालवी, सन्तोष सालवी, वरजु सालवी, सुरेश मीणा, खुमान सिंह राव, रामचंद्र सालवी, एडवोकेट मदन मेघवाल देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के अधिकारों के लिए आंदोलनकर्ता सोनम वांगचुक जी के प्रति दमनकारी रवैये के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति महोदया को कलक्टर के मार्फत केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई कि
हम संवैधानिक अधिकार जनजागृति संस्थान के माध्यम से आपका ध्यान देश में गहराते शिक्षा पर संकट, संविधानिक लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों पर केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश से पुलिस द्वारा दमनकारी कार्यवाही की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, शिक्षाविद् और वैज्ञानिक मान्यवर सोनम वांगचुक जी अनशन पर बैठे थे। उनके अनशन के 21वें दिन जिस प्रकार उन्हें सादे वस्त्रधारी दिल्ली पुलिस द्वारा बल पूर्वक उनकी इच्छा के विरूद्ध गालियां देते हुए जबरदस्ती उठाया गया। यह कृत्य भारतीय संविधान लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। निम्नलिखित मुख्य मांगें इस प्रकार हैं।
- भारतीय संविधान को मानने वाले प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर अपनी बात रखने का अधिकार देता है। सोनम वांगचुक जी के खिलाफ की गई बलपूर्वक कार्रवाई की न्याययिक जांच कराई जाये और उनके संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में लगातार आ रही गिरावट युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और जन आकांक्षाओं को अनदेखा करने की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
- शिक्षा प्रणाली में ठोस सुधार कर सरकार युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए केवल वादों के बजाय शिक्षा/चिकित्सा व्यवस्थाए युवाओं के रोजगार हेतु धरातल पर ठोस व पारदर्शी नीतियां लागू कर उज्ज्वल भविष्य के लिये कार्य करें।
- संवैधानिक व लोकतांत्रिक आवाज को दबाने और बलपूर्वक हटाने की नीतियों को तुरंत बंद कर सरकार को आंदोलनकारियों व देश के युवाओं के साथ सम्मानजनक संवाद स्थापित करना चाहिए। भारत का युवा देश के संविधान और लोकतंत्र पर आघात को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। ह
आप इस विषय में हस्तक्षेप करें और सरकार को युवाओं व संविधान के हित में उचित निर्देश जारी करें।

