Thursday, July 16, 2026
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रामपायली में नशे के खिलाफ बुलंद हुई युवा शक्ति की आवाज, छात्राओं ने लिया नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प

“नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान के तहत पुलिस एवं शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल, शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में दिलाई गई नशामुक्ति की शपथ

मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने | बालाघाट

रामपायली/बालाघाट। मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित जनजागरूकता अभियान “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” के तहत रामपायली स्थित शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में गुरुवार को नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं, शिक्षकों और पुलिस अधिकारियों ने समाज को नशामुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना तथा उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम का आयोजन थाना रामपायली के नवागत थाना प्रभारी विनोद यादव के नेतृत्व एवं पुलिस विभाग के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर उप निरीक्षक कलशराम उइके, सहायक उप निरीक्षक तरुण सोनेकर, आरक्षक नागेश बघेल, रानू चौधरी, रजनी रजक, आरक्षक आर. नरोत्तम सहित थाना रामपायली का पुलिस बल उपस्थित रहा। विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।

विद्यालय की प्राचार्य मंजुषा ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी सबसे बड़ी बाधा बनता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक मूल्यों के निर्माण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि विद्यार्थी आज से नशे के प्रति जागरूक होंगे तो आने वाला समाज निश्चित रूप से अधिक स्वस्थ और सशक्त होगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिक्षिका भावना पटले ने छात्राओं एवं उपस्थित सभी लोगों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। उन्होंने सभी से स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। विद्यालय परिसर में जब सैकड़ों छात्राओं ने एक साथ हाथ उठाकर नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया तो पूरा वातावरण उत्साह, ऊर्जा और सामाजिक चेतना से भर उठा।

उप निरीक्षक कलशराम उइके ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में नशा युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। शराब, तंबाकू, गुटखा, सिगरेट और अन्य मादक पदार्थ युवाओं की प्रतिभा, स्वास्थ्य और जीवन को धीरे-धीरे नष्ट कर देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि आसपास कोई व्यक्ति नशे की लत में दिखाई दे तो उसे समझाने का प्रयास करें तथा आवश्यकता पड़ने पर पुलिस और प्रशासन को सूचना दें। पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक कर नशे जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करना भी है।

पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को बताया कि नशा मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। नशे की लत कई बार अपराध, सड़क दुर्घटनाओं, घरेलू हिंसा, पारिवारिक विघटन और सामाजिक असुरक्षा का कारण बनती है। उन्होंने कहा कि यदि युवा वर्ग नशे से दूर रहेगा तो समाज और राष्ट्र का भविष्य अधिक सुरक्षित एवं उज्ज्वल होगा।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन, खेलकूद, शिक्षा और सकारात्मक सोच ही सफलता की वास्तविक कुंजी है। छात्राओं से अपने घरों, गांवों और समाज में नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने तथा लोगों को जागरूक करने की अपील भी की गई।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेशभर में 15 से 30 जुलाई 2026 तक “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य वर्ष 2029 तक नशामुक्त मध्यप्रदेश और नशामुक्त भारत के संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से साकार करना है। अभियान के तहत विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, शासकीय कार्यालयों और नगरीय निकायों में रैली, शपथ, संगोष्ठी, पोस्टर प्रतियोगिता, मानव श्रृंखला सहित विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

रामपायली में आयोजित यह कार्यक्रम पुलिस एवं शिक्षा विभाग के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण रहा। कार्यक्रम के अंत में छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगी तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी। आयोजन में विद्यालय का समस्त शिक्षकीय स्टाफ, पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। पूरे कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि नशामुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है, जब प्रशासन, विद्यालय, परिवार और समाज मिलकर इसे जनआंदोलन का स्वरूप दें।

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