
संकुल विकास योजना, एफएलएन लक्ष्य, मुस्कान पुस्तकालय और बाल संसद को लेकर बनी कार्ययोजना


बम्हनीडीह। विकासखंड बम्हनीडीह के बीआरसी सभागार में ‘मोर संकुल मोर सपना’ थीम पर संकुल समन्वयकों (सीएसी) की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में 30 में से 26 संकुल समन्वयकों ने भाग लिया। नए शैक्षणिक सत्र की प्रभावी शुरुआत, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तथा वर्षभर की संकुल विकास योजना को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला के प्रारंभ में बीआरसी हिरेंद्र बेहार ने शासन के निर्देशानुसार सभी विद्यालयों में कक्षा स्तर के अनुरूप 20 तक पहाड़े एवं बारहखड़ी का नियमित अभ्यास कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक विद्यालय में सतत शैक्षणिक गतिविधियों का प्रभावी संचालन आवश्यक है।
कार्यशाला में प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से सभी संकुल समन्वयकों ने अपने-अपने संकुल के उत्कृष्ट शिक्षक, बेहतर विद्यालय, सक्रिय प्रधानपाठक तथा पुस्तकालयों की जानकारी साझा की। साथ ही आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए निर्धारित लक्ष्यों एवं कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा की गई।

इस अवसर पर कार्यशाला स्थल पर मुस्कान पुस्तकालय, बाल संसद, गणित कोना, भाषा कोना, विज्ञान कोना तथा दीवार पत्रिका के आकर्षक स्टॉल लगाए गए, जिनका प्रतिभागियों ने अवलोकन किया।
संकुल समन्वयक विश्वनाथ कश्यप ने मुस्कान पुस्तकालय, रचनात्मक लेखन एवं दीवार पत्रिका की कार्ययोजना प्रस्तुत की, जबकि शरद चतुर्वेदी ने एफएलएन मेला, मापन मेला तथा विज्ञान गतिविधियों पर अपनी प्रस्तुति दी।
बीआरसी हिरेंद्र बेहार ने विकासखंड की समग्र शैक्षणिक विकास योजना पर मार्गदर्शन देते हुए मुस्कान पुस्तकालय, बाल संसद, विज्ञान कॉर्नर, एफएलएन लक्ष्य प्राप्ति तथा बस्ता रहित शनिवार को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की। उन्होंने सभी संकुल समन्वयकों को पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया।
कार्यशाला में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विकासखंड के शत-प्रतिशत विद्यालयों में पाँच माइलस्टोन के आधार पर मुस्कान पुस्तकालय स्थापित किए जाएंगे। 15 अगस्त तक सभी माध्यमिक विद्यालयों में बाल संसद का गठन सुनिश्चित किया जाएगा। एफएलएन लक्ष्य प्राप्ति के लिए अभ्यास पुस्तिकाओं एवं शिक्षण किट का नियमित उपयोग किया जाएगा तथा सभी विद्यालयों में विज्ञान किट के माध्यम से निर्धारित मानकों के अनुरूप विज्ञान कॉर्नर विकसित किए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त चार से पाँच संकुलों को मिलाकर नियमित विषय-आधारित अकादमिक बैठकें आयोजित करने तथा बस्ता रहित शनिवार को सभी विद्यालयों में समान गतिविधियों के साथ संचालित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही सीएसी एवं पीएलसी शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए चिन्हित उत्कृष्ट विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना भी बनाई गई।
कार्यशाला में यह भी तय किया गया कि मुस्कान पुस्तकालय के माध्यम से सप्ताह में तीन दिन कम से कम 30 मिनट तक शिक्षक बच्चों के साथ बैठकर पुस्तक पठन की आदत विकसित करेंगे। तिमाही के अंत में बाल संसद एवं मुस्कान पुस्तकालय की प्रगति की समीक्षात्मक प्रस्तुति भी संकुल समन्वयकों द्वारा दी जाएगी।
पूरी कार्यशाला चर्चा-परिचर्चा एवं सहभागिता आधारित रही, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव, नवाचार, सफलताएँ एवं चुनौतियाँ साझा कीं। कार्यशाला में बीआरसी हिरेंद्र बेहार, मीडिया प्रभारी उमेश दुबे तथा अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन से राहुल, ऋत्विक और निशांत सहित सभी संकुल समन्वयकों की सक्रिय सहभागिता रही।

