
खानपान में सावधानी बरतने और बच्चों, बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल की सलाह
रायपुर, 14 जुलाई। मानसून के आगमन के साथ जहां भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं वातावरण में बढ़ी नमी और उमस के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। कृषि विज्ञान केन्द्र, रायगढ़ की आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. मनीषा चौधरी ने लोगों से इस मौसम में खानपान और स्वच्छता को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
डॉ. चौधरी ने बताया कि वर्षा ऋतु में बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद तेजी से पनपते हैं, जिससे भोजन और पेय पदार्थ आसानी से दूषित हो जाते हैं। इसके कारण दस्त, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम तथा अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में ताजा, पौष्टिक, सुपाच्य और स्वच्छ भोजन का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने सलाह दी कि तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार, बासी तथा खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें। कटे हुए फल, खुले में मिलने वाले जूस, चाट, गोलगप्पे और अन्य स्ट्रीट फूड का सेवन न करें। पीने के लिए हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ स्वच्छ पानी ही उपयोग करें तथा घर का ताजा और अच्छी तरह पका भोजन ही खाएं।
डॉ. चौधरी ने कहा कि भोजन को हमेशा ढककर रखें, फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर उपयोग करें तथा कच्चे और पके खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखें। दालें, अंकुरित अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां तथा विटामिन-सी युक्त फल जैसे आंवला, अमरूद और संतरा आहार में शामिल करें। करेला, मेथी, हल्दी, तुलसी और नीम जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
उन्होंने पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीने, ग्रीन टी, हर्बल टी, गर्म सूप, खिचड़ी, दलिया और भुट्टे जैसे हल्के एवं सुपाच्य खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। साथ ही रसोई की नियमित सफाई रखने, फ्रिज में रखे भोजन को दोबारा खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करने तथा बारिश में भीगने पर तुरंत सूखे और साफ कपड़े पहनने की सलाह भी दी, ताकि फंगल संक्रमण से बचा जा सके।
विशेषज्ञ ने कहा कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के खानपान एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील करते हुए कहा कि इससे मच्छरों का प्रजनन बढ़ता है और डेंगू, मलेरिया तथा चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. चौधरी ने नियमित हल्का व्यायाम, योग और पर्याप्त नींद को भी बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया। उन्होंने सलाह दी कि यदि लगातार बुखार, उल्टी, दस्त या शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें और स्वयं दवा लेने से बचें। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भोजन, सुरक्षित पेयजल, संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मानसून के दौरान होने वाले मौसमी संक्रमणों से प्रभावी बचाव किया जा सकता है।

