न्यूज़ छत्तीसगढ़
महादेव कावरे जी
सेवानिवृत्ति केवल प्रशासनिक सेवा से हुई है, समाज सेवा में उनकी नई पारी अब और अधिक प्रभावशाली होगी” – कमलेश लव्हात्रे
मूकनायक
दिलीप मैश्राम
बिलासपुर। छत्तीसगढ़
पूर्व रायपुर संभाग आयुक्त एवं वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी, छत्तीसगढ़ भारतीय बौद्ध समाज के प्रेरणास्रोत महादेव कावरे के सम्मान के सेवा निवृत्त सम्मान समारोह बौद्ध समाज बिलासपुर के अध्यक्ष सारंग राव हुमने के नेतृत्व में आयोजित की गई ।
इस गरिमामय सम्मान समारोह में समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा, बच्चे तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। यह आयोजन केवल एक वरिष्ठ प्रशासक के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, संघर्ष, ईमानदारी, सामाजिक प्रतिबद्धता और बौद्ध समाज की एकजुटता का प्रेरक संदेश देकर लंबे समय तक स्मरणीय बन गया।
सेवा निवृत्त सम्मान समारोह” में पंचशील बौद्ध विहार परिवार ने भी पूरे सम्मान और आत्मीयता के साथ सहभागिता निभाई। विहार के समस्त सदस्यों ने सामूहिक रूप से महादेव कावरे का शॉल भेंट कर नागरिक अभिनंदन किया तथा उनके दीर्घ, प्रेरणादायी और जनसेवा से परिपूर्ण जीवन को समाज के लिए गौरव का विषय बताया।
इस अवसर पर पंचशील बौद्ध विहार की ओर से बौद्ध उपासक एवं वरिष्ठ पत्रकार कमलेश लव्हात्रे ने अपने भावपूर्ण उद्बोधन में कहा कि “सेवानिवृत्ति” शब्द प्रायः व्यक्ति को सीमित कर देता है, किंतु श्री महादेव कावरे के संदर्भ में इसका अर्थ केवल प्रशासनिक सेवा की औपचारिक पूर्णता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की अपनी नियमावली होती है, जिसके अनुसार अधिकारी सेवानिवृत्त होते हैं, लेकिन समाज सेवा, मार्गदर्शन और जनहित के कार्यों की कोई आयु-सीमा नहीं होती।
उन्होंने कहा कि सेवा काल के दौरान श्री महादेव कावरे ने अनेक सामाजिक, शैक्षणिक एवं बौद्ध समाज के आयोजनों में उपस्थित होकर बिलासपुर सहित पूरे क्षेत्र के समाजजनों को समय-समय पर मार्गदर्शन दिया। उनका स्नेह, सहजता और समाज के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणादायी रहा है। अब जबकि वे प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त हुए हैं, समाज को विश्वास है कि वे पहले से भी अधिक समय और ऊर्जा के साथ सामाजिक चेतना, शिक्षा, संगठन और समाजोत्थान के कार्यों को नई गति प्रदान करेंगे।
कमलेश लव्हात्रे ने भावुक शब्दों में कहा, “हमारे लिए वे पहले भी कावरे साहब थे, आज भी कावरे साहब हैं और आगे भी सदैव कावरे साहब ही रहेंगे। पद से नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व, सादगी, ईमानदारी और समाज के प्रति समर्पण से उन्होंने लोगों के दिलों में जो स्थान बनाया है, वही उनका सबसे बड़ा सम्मान है।”
पंचशील बौद्ध विहार परिवार ने श्री महादेव कावरे के स्वस्थ, सक्रिय एवं दीर्घ सामाजिक जीवन की मंगलकामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनका अनुभव, नेतृत्व और मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।







