मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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संसार एक रंगमंच है, जहाँ हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभाने के लिए एक सीमित समय मिलता है। इस अल्पावधि में मनुष्य जो कुछ भी करता है, वह उसके जाने के बाद भी इस दुनिया में गूंजता रहता है। वास्तव में, धन-दौलत, जमीन जायदाद या भौतिक सुख-साधन मनुष्य का असली मूल्यांकन नहीं करते, बल्कि उसके द्वारा किए गए कर्म और उनकी गूंज ही उसके जीवन का असली बहीखाता है। कर्म ही मनुष्य के अस्तित्व की पहचान है। संसार में आने के बाद हर व्यक्ति कर्म करने के लिए बाध्य है। कोई भी व्यक्ति एक क्षण भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता।
लोग जिंदगी भर पाई-पाई जोड़ने में लगे रहते हैं, लेकिन मृत्यु के क्रूर सच के सामने यह भौतिक बहीखाता शून्य हो जाता है। सिकंदर जैसा महान सम्राट भी जब इस दुनिया से गया तो उसके हाथ खाली थे। मनुष्य अपने साथ केवल अपने कर्मों का लेखा-जोखा ले जाता है और पीछे छोड़ जाता है अपने कार्यों की गूंज। मनुष्य का शरीर नश्वर है, वह पंचतत्व में विलीन हो जाता है, लेकिन उसके द्वारा किए गए कार्य अमिट होते हैं। जब कोई व्यक्ति समाज, मानवता या राष्ट्र के लिए कोई उत्कृष्ट कार्य करता है तो उसके जाने के बाद भी उसकी गूंज सदियों तक सुनाई देती है। इसलिए सच्चा जीवन वह नहीं है, जो केवल अपने लिए जिया जाए, बल्कि वह है जो दूसरों के जीवन में प्रकाश भर दे।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

