मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन एक अनमोल उपहार है, जिसकी सबसे बड़ी खूबी इसका सीमित होना है। यह कब शुरू होता है और कब खत्म, इसका सटीक अनुमान किसी को नहीं है। इतने छोटे और मूल्यवान जीवन को यदि हम छोटी-मोटी शिकायतों, ईर्ष्या और आपसी मनमुटाव में गंवा देते हैं, तो यह हमारी सबसे बड़ी नासमझी है। जब हम किसी से शिकायत करते हैं या अतीत की कड़वाहट को पकड़कर बैठते हैं, तो हम अपने आज की ऊर्जा को नष्ट कर रहे होते हैं। बीता हुआ कल कभी लौटकर नहीं आता । नकारात्मक सोच और शिकायतें हमारे मस्तिष्क में तनाव पैदा करती हैं, जिससे हमारा स्वास्थ्य और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित होते हैं। जो व्यक्ति हमेशा कमियों को देखता है, वह जीवन में मौजूद अनगिनत खूबसूरत चीज़ों (जैसे समाज/परिवार का प्यार, प्रकृति का सौंदर्य, और छोटी-छोटी खुशियाँ) का आनंद लेने से चूक जाता है।
अतः”जीवन को गिन-गिन कर काटने के बजाय, हर पल को खुलकर जीने में ही असली समझदारी है।”
सच्ची बुद्धिमानी इस बात को स्वीकार करने में है कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति या परिस्थिति पूर्ण नहीं हो सकती। गलतियों को माफ करना, दूसरों की कमियों को नजरअंदाज करना और आगे बढ़ना ही जीवन जीने की सही कला है। जब हम आभार व्यक्त करना शुरू करते हैं, तो शिकायतें अपने आप गायब हो जाती हैं। जीवन एक कैनवास की तरह है, जिसमें हम जैसे रंग भरना चाहें, भर सकते हैं। छोटी-मोटी शिकायतों के काले रंगों से इसे बदरंग करने के बजाय, आइए इसे प्रेम, क्षमा, और आनंद के जीवंत रंगों से सजाएं। याद रखिए, समय कम है और रास्ते लंबे, इसलिए मुस्कुराइए और आगे बढ़िए!
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

