Saturday, July 25, 2026
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केवल एक या दो मिनिस्टरों के इस्तिफे से क्या होगा? पूरे बीजेपी पावर को ही हटाना होगा

By Vijaybhai Maisuriya

कभी कभी ऐसा माहौल का निर्माण होता है तब दलित शूरा बन जाते हैं और बाबासाहेब की फोटो हाथ में लेकर हर लड़ाई लड़ने निकल पड़ते हैं। लेकिन यहां वे भूल जाते हैं कि बाबासाहेब ने क्या कहा था। बिना किसी मिशन और आइडियोलॉजी वाला नौजवान सुसाइड बॉम्बर जैसा होता है। जो अपने विरोधियों से ज़्यादा अपने ही लोगों को नुकसान पहुंचाता है। किसी भी मूवमेंट में मकसद, तैयारी, लीडरशिप और इरादों की जानकारी के बिना नहीं कूदना चाहिए। एक कैडर बेस पार्टी जो पिछले 100 सालों से ग्रासरूट लेवल पर एक्टिव है, उसे रैली या दंगे से नहीं हराया जा सकता। इसके लिए उतनी ही मेहनत लगती है। BJP के हिंदुत्व को ग्रासरूट लेवल पर लोगों को अवेयर करके, अपनी आइडियोलॉजी समझाकर, एक अच्छे से ऑर्गनाइज़्ड प्रोग्राम करके और लोगों में अपनी आइडियोलॉजी के लिए मर मिटने का जोश पैदा करके ही हराया जा सकता है। सबसे पहले, यह मानना ​​कि एक मिनिस्टर के इस्तीफे से पूरा एजुकेशन सिस्टम बदल जाएगा, गलत है। और यह सोचना कि एक मिनिस्टर के इस्तीफे से BJP पर कोई फर्क पड़ेगा, गलत है।
सारे भारत में विद्यार्थियों जो अलग-अलग परिस्थितियों में पढ़ते हैं तो वह सभी के लिए एक परीक्षा पद्धति अपनाना वो अन्याय है मेरिट और प्रवेश परीक्षाएं ये दलित पछात और आदिवासियों को नुकसान करने वाली पद्धतियां हैं पाया की समस्या ऐसी NEET परीक्षा ही नहीं होनी चाहिए NEET परीक्षा रद्द होनी चाहिए। मुद्दा एक एग्जाम, एक पोर्टफोलियो या एक मिनिस्टर का नहीं है। मुद्दा पूरी आइडियोलॉजी का है। BJP की हिंदुत्व आइडियोलॉजी में क्या कमी है? क्या एक मिनिस्टर का इस्तीफा लेकर BJP अपनी आइडियोलॉजी बदल देगी? बेसिक प्रॉब्लम BJP की हिंदुत्व आइडियोलॉजी है। और इसका परमानेंट सॉल्यूशन एक-दो मिनिस्टर का इस्तीफा नहीं बल्कि पूरी BJP को पावर से हटाना है। इसीलिए BJP बेफिक्र है। और वह ऐसे खेल खेल रही है जैसे कॉकरोच का पानी नाप रही हो। इस मूवमेंट से BJP को कोई नुकसान नहीं है।
बिना लीडरशिप वाला यूथ एक जीते-जागते बम जैसा है। इसमें कोई शक नहीं कि सोशल मीडिया की पहचान बनाने की जल्दबाजी, जो सिर्फ एक सटायर से पैदा हुई, सीधे पॉलिटिक्स के फील्ड में बिना किसी एक्सपीरियंस के, इस पूरे मूवमेंट को डुबो देगी।
फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि BJP और RSS इस पूरे मूवमेंट को प्रेशर कुकर वाल्व की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि नेपाल में हुई वायलेंट रेवोल्यूशन का एग्जांपल देकर यूथ और कम्युनिस्ट लीडर्स को टेस्ट किया जा रहा है।
लेकिन, इन सब में, जो दलित युवा बाबा साहेब की तस्वीरें लेने के लिए सबसे ज़्यादा उत्साहित हैं, उन्हें पूछना होगा कि उस जातिवादी सिस्टम का विरोध कौन करेगा जो दलित स्टूडेंट्स, जिन्होंने मेहनत करके NEET एग्जाम पास किया है और मेडिकल स्कूलों में एडमिशन लिया है, उन्हें जातिवादी मेंटल टॉर्चर देकर सुसाइड करने पर मजबूर करता है?

रिजर्वेशन पर हो रहे हमलों का विरोध कौन करेगा?


दलितों और आदिवासियों की लड़ाई BJP या कांग्रेस के किसी मंत्री से नहीं, बल्कि हिंदुत्व की पूरी आइडियोलॉजी से है। और आइडियोलॉजी की लड़ाई सड़क के गुंडे बनकर नहीं, बल्कि स्ट्रेटेजिक वॉरियर्स बनकर लड़नी है।
बिना आइडियोलॉजी वाले युवा, जो बाबा साहेब, भगत सिंह, गांधी इन सबको इकट्ठा करके गड़बड़ करने के लिए बैठे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि गांधी और बाबा साहेब कभी एक साथ नहीं हो सकते। गांधी और भगत सिंह कभी एक साथ नहीं रह सकते। लीड करने से पहले युवाओं को मिशन और आइडियोलॉजी की भट्टी में भूनना होगा।

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