Tuesday, September 29, 2026
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आरक्षित वन में वन्यजीवों के शिकार पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, पांच आरोपी गिरफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग ने आरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों के शिकार के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। न्यायालय में पेशी के बाद सभी आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है तथा वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार और अवैध गतिविधियों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार धमतरी वनमंडल के बिरगुड़ी परिक्षेत्र अंतर्गत खैरभरी बीट के आरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों के शिकार की सूचना मिलने पर वन विभाग सक्रिय हुआ। वनमंडलाधिकारी कांकेर से मिली जानकारी के अनुसार 4 जुलाई को ग्राम भनसुली, तहसील नरहरपुर (जिला कांकेर) के पांच लोगों पर तीन धामन (असोड़िया) सांप तथा एक गोह का शिकार करने का आरोप है। आरोप है कि शिकार किए गए वन्यजीवों को एक आरोपी के घर ले जाकर उनके टुकड़े किए गए और भोजन के रूप में उपयोग किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वनमंडलाधिकारी जाधव श्रीकृष्ण के निर्देशन में धमतरी वनमंडल, कांकेर वनमंडल, उड़नदस्ता दल तथा एंटी-पोचिंग टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। जांच और पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित रूप से अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वन विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया है। सभी आरोपियों को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, नगरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से न्यायालय ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है और यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत संरक्षित वन्यजीवों का शिकार, अवैध कब्जा अथवा व्यापार गंभीर अपराध है, जिसके लिए तीन से सात वर्ष तक के कारावास तथा आर्थिक दंड का प्रावधान है।

वन विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में सक्रिय सहयोग करें। यदि कहीं भी वन्यजीवों के शिकार, अवैध परिवहन, व्यापार या अन्य वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी तत्काल सूचना वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके। विभाग का कहना है कि जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए वन्यजीवों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।

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