फूले निःशुल्क पाठशाला के छात्रों ने पंचशील बौद्ध विहार को भेंट किया वैचारिक साहित्य
पंचशील बौद्ध विहार, टिकरापारा आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, वैचारिक जागृति और सामूहिक शिक्षण का एक जीवंत केंद्र बनकर उभर रहा है। विहार में निरंतर ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जिनसे समाज में अध्ययन, संवाद, संगठन और प्रबोधन की संस्कृति सुदृढ़ हो सके।
इसी क्रम में कुछ समय पूर्व विहार के वरिष्ठ उपासक आयुष्मान कमलेश लाव्हत्रे जी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण विचार रखा था। उनका मानना था कि जब प्रतिदिन फूले निःशुल्क पाठशाला के छात्र-छात्राएँ यहां अध्ययन हेतु आते हैं और प्रत्येक रविवार को उपासकगण सामूहिक बुद्ध वंदना एवं धम्मचर्चा में सहभागी होते हैं, तब विहार को साहित्य और अध्ययन की परंपरा से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है। विचारों के बिना परिवर्तन संभव नहीं होता और पुस्तकों के बिना विचारों का विस्तार अधूरा रह जाता है।
इस आवश्यकता को समझते हुए विहार में पुस्तकालय की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम आयुष्मान प्रदीप वासनिक जी द्वारा उठाया गया। उनके सहयोग से विहार में एक सुंदर बुक शेल्फ स्थापित किया गया, जिसने ज्ञान और अध्ययन की नई संभावनाओं के लिए स्थान निर्मित किया।
आज उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए फूले निःशुल्क पाठशाला के छात्रों ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा ज्योतिराव फुले तथा बहुजन चिंतन और सामाजिक परिवर्तन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों को पंचशील बौद्ध विहार को भेंट किया। यह केवल पुस्तकों का दान नहीं है, बल्कि ज्ञान, जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का अनुपम उदाहरण है।
विशेष प्रसन्नता की बात यह है कि जिन बच्चों के हाथों में आज पुस्तकें हैं, वही बच्चे कल समाज में समता, बंधुत्व, न्याय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के वाहक बनेंगे। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब बच्चों को सही दिशा, सही वातावरण और सही विचार मिलते हैं, तो वे स्वयं भी ज्ञान के संवाहक बन जाते हैं।
पंचशील बौद्ध विहार परिवार उन सभी छात्रों, अभिभावकों एवं सहयोगियों के प्रति हार्दिक मंगलकामनाएँ व्यक्त करता है, जिन्होंने इस वैचारिक अभियान को सशक्त बनाने में अपना योगदान दिया। आशा है कि यह साहित्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, अध्ययन और सामाजिक चेतना का आधार बनेगा तथा विहार को एक सशक्त ज्ञान, धम्म और प्रबोधन केंद्र के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जय भीम • नमो बुद्धाय


