Tuesday, September 29, 2026
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प्राकृतिक खेती की दिशा में बड़ा कदम: वारासिवनी के तीन गांवों में क्लस्टर गठन, किसानों का पंजीयन शुरू

मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने | वारासिवनी/बालाघाट

वारासिवनी। कृषि में बढ़ते रासायनिक उपयोग और भूमि की घटती उर्वरता के बीच प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक बेहतर एवं टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर रही है। किसानों को रसायनमुक्त खेती से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 23 जून को ग्राम पंचायत सिंगोड़ी, बघोली एवं कोलीवाड़ा को मिलाकर प्राकृतिक खेती का एक क्लस्टर गठित किया गया तथा किसानों का पंजीयन कार्य संपन्न कराया गया।

उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग फूलसिंह मालवीय ने बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। तीनों ग्राम पंचायतों को एक क्लस्टर के रूप में विकसित करने का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती से जोड़ना है, जिससे वे इसके लाभ प्राप्त कर सकें।

पंजीयन अभियान के दौरान किसान मित्र दीदियों ने गांव-गांव पहुंचकर किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व और इसके दीर्घकालिक लाभों से अवगत कराया। किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के स्थान पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों का उपयोग किया जाता है, जिससे खेती की लागत कम होती है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

कार्यक्रम में किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, आच्छादन एवं वाफसा जैसी महत्वपूर्ण प्राकृतिक खेती तकनीकों की जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है तथा खेतों में जैव विविधता का संरक्षण होता है। साथ ही किसानों की निर्भरता महंगे रासायनिक उत्पादों पर कम हो जाती है।

कृषि अधिकारियों ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य से जुड़ा एक व्यापक अभियान है। रसायनमुक्त कृषि से मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध होता है।

फूलसिंह मालवीय ने बताया कि जिले में क्लस्टर आधारित मॉडल पर कार्य किया जा रहा है, जिससे किसान आपस में अनुभव साझा कर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी इसी प्रकार के जागरूकता एवं पंजीयन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कृषि विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़कर कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है।

कृषि विभाग ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाकर कम लागत में अधिक लाभ अर्जित करने तथा शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने की अपील की है। वारासिवनी क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल जिले में प्राकृतिक खेती के विस्तार और कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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