

सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर मेडिकल लापरवाही का आरोप, नागपुर के आईसीयू में जिंदगी-मौत के बीच जूझ रहा विवेक तिरपुड़े
मूकनायक समाचार / सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
बालाघाट। शहर का चर्चित सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी अस्पतालों की जवाबदेही और कथित मेडिकल लापरवाही को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। हाथ की एक मामूली चोट (फ्रैक्चर) के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे एक स्वस्थ युवक विवेक तिरपुड़े की जिंदगी पिछले लगभग 100 दिनों से कोमा में झूल रही है। इस घटना से आक्रोशित परिजनों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने रविवार शाम शहर की सड़कों पर उतरकर कैंडल मार्च निकाला और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, करीब 100 दिन पहले विवेक को हाथ में चोट लगने के बाद उक्त अस्पताल ले जाया गया था। डॉक्टरों ने मामूली फ्रैक्चर बताते हुए एक छोटी और सामान्य सर्जरी की बात कही थी, जिसके लिए करीब 20 मिनट का समय मांगा गया था। लेकिन ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने अचानक विवेक को हार्ट अटैक आने की बात कह दी, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और वह कोमा में चला गया। वर्तमान में उसका इलाज नागपुर के एक अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर (मशीनों) के सहारे जारी है।
परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल, एनेस्थीसिया में चूक की आशंका-
विवेक के भाई अमित तिरपुड़े ने मीडिया से चर्चा में अस्पताल प्रबंधन पर सीधे तौर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान कोई गंभीर चूक हुई है या फिर एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) देने में लापरवाही बरती गई है। इस घटना ने केवल एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक मामूली फ्रैक्चर की सर्जरी के बाद मरीज कोमा में कैसे जा सकता है?
“जस्टिस फॉर विवेक” के नारों से गूंजी सड़कें
न्याय की गुहार लगाते हुए रविवार शाम विवेक के परिजनों, मित्रों और सामाजिक संगठनों ने हाथों में मोमबत्तियां और “स्टॉप मेडिकल नेग्लिजेंस” तथा “जस्टिस फॉर विवेक तिरपुड़े” जैसे बैनर-पोस्टर लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला। इस कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। मार्च के दौरान एक मां का दर्द उस समय छलक उठा जब उन्होंने रोते हुए कहा, “हम अपने बेटे को मामूली इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए थे, लेकिन आज वह हमें पहचान भी नहीं पा रहा।”
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार, मेडिकल बोर्ड की जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत या आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार अस्पताल पक्ष अपनी प्रक्रिया को सही बता रहा है। वहीं, कानूनी जानकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मेडिकल लापरवाही के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन हैं। परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और ऑपरेशन से जुड़े सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

