महरौनी। नगर में संचालित कबाड़ कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों मिली जानकारी के अनुसार पहलवान कुरेशी को छोड़कर गुड्डू कुरेशी और हमीद कुरैशी सहित कई कबाड़ कारोबारियों द्वारा बिना वैध लाइसेंस और आवश्यक अनुमति के कबाड़ की दुकानें संचालित की जा रही हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बिना पंजीकरण चल रहे इस कारोबार से चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त, बाल श्रम, मजदूर शोषण और अवैध गतिविधियों की आशंका लगातार बढ़ रही है। लोगों ने प्रशासनिक विभागों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।
जानकारों के अनुसार कबाड़ कारोबार संचालित करने के लिए नगर पंचायत या नगर पालिका से व्यापार लाइसेंस, दुकान एवं स्थापना अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण, जीएसटी पंजीकरण, पुलिस सत्यापन तथा कई मामलों में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी आवश्यक होती है। यदि कारोबार में ई-वेस्ट, बैटरी, प्लास्टिक, लोहे की कटिंग, केमिकल या ज्वलनशील सामग्री शामिल हो तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति भी जरूरी मानी जाती है। नियमों के अनुसार कबाड़ खरीदने-बेचने का पूरा रिकॉर्ड रखना, माल बेचने वाले व्यक्ति की पहचान दर्ज करना तथा संदिग्ध सामग्री की सूचना पुलिस को देना आवश्यक होता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर की कई कबाड़ दुकानों पर नाबालिग बच्चों से भी कबाड़ खरीदा जाता है। लोगों का कहना है कि चोरी की मोटर, बिजली के तार, सरकारी लोहे के सामान, ट्रांसफार्मर पार्ट्स और घरेलू उपकरण बिना पर्याप्त जांच के खरीदे जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों से कबाड़ खरीदना अप्रत्यक्ष रूप से बाल श्रम और चोरी को बढ़ावा देता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी कबाड़ दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे, खरीद रजिस्टर और पहचान पत्र सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
इसी के साथ अब मजदूरों के शोषण के आरोप भी खुलकर सामने आने लगे हैं। मजदूरों का कहना है कि श्रम कानूनों के अनुसार सामान्यतः 8 घंटे कार्य समय निर्धारित होता है, लेकिन कबाड़ गोदामों में सुबह 9 बजे से लेकर रात्रि 11-12 बजे तक लगातार काम कराया जाता है। यानी कई मजदूरों से प्रतिदिन 14 से 15 घंटे तक श्रम लिया जा रहा है। आरोप है कि अतिरिक्त समय काम कराने के बावजूद ओवरटाइम मजदूरी नहीं दी जाती, बल्कि कई जगह मजदूरों को शराब पिलाकर मामला दबाने का प्रयास किया जाता है। मजदूरों का यह भी कहना है कि उन्हें समय पर भोजन तक नहीं करने दिया जाता और बेहद कम मजदूरी में अत्यधिक श्रम कराया जाता है।
कुछ श्रमिकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कबाड़ दुकानों में काम के दौरान गाली-गलौज, अभद्र भाषा और अपमानजनक व्यवहार आम बात बन चुकी है। विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि मजदूर केवल श्रम देने वाली मशीन नहीं हैं, उन्हें सम्मान और सुरक्षित वातावरण देना भी नियोक्ताओं की जिम्मेदारी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर काम लेने के साथ सम्मान देना कब सीखा जाएगा?
कानूनी जानकार बताते हैं कि बिना लाइसेंस कारोबार, श्रम कानून उल्लंघन, बाल श्रम, प्रदूषण नियमों की अनदेखी और संदिग्ध सामान खरीदने के मामलों में नगर निकाय, श्रम विभाग, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग संयुक्त कार्रवाई कर सकते हैं। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना, गोदाम सील करना और मुकदमा दर्ज करने तक की कार्रवाई संभव है।
क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि महरौनी प्रशासन नगर के सभी कबाड़ कारोबारियों का सत्यापन कराए, उनके लाइसेंस सार्वजनिक करे, मजदूरों की कार्य स्थितियों की जांच कराए तथा बिना अनुमति संचालित दुकानों पर संयुक्त अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं की गई तो चोरी, अवैध कारोबार, बाल श्रम और मजदूर शोषण जैसी समस्याएं और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं।

