



मूकनायक समाचार
सत्यशील गोंडाने, बालाघाट
मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा से बहने वाली बावनथड़ी नदी में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन के मामलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। नदी क्षेत्र में लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद बालाघाट एवं भंडारा जिले के खनिज विभागों के बीच सीमांकन और संबंधित अभिलेखों को लेकर पत्राचार शुरू किया गया है।
जानकारी के अनुसार, बावनथड़ी नदी के कुछ घाटों पर अंतर्राज्यीय सीमा स्पष्ट नहीं होने के कारण अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं। आरोप है कि सीमा की अस्पष्टता का लाभ उठाकर रेत माफिया अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इसी को देखते हुए दोनों राज्यों के अधिकारियों ने दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ की है।
बालाघाट कलेक्टर के निर्देशन में खनिज विभाग द्वारा पुराने रिकॉर्ड, राजस्व नक्शों एवं संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। वहीं महाराष्ट्र के भंडारा जिले के खनिज अधिकारियों से भी इस संबंध में आवश्यक जानकारी एवं अभिलेखों का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
ग्राम चिचोली के सरपंच कैलाश नाथ तुरकर ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि नदी क्षेत्र में लंबे समय से रेत चोरी की शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन स्पष्ट सीमांकन नहीं होने से कार्रवाई प्रभावित होती रही है। उन्होंने दोनों राज्यों के प्रशासन से संयुक्त रूप से सीमांकन कर प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नदी घाटों और सीमाओं से संबंधित अभिलेखों की जांच जारी है तथा अवैध उत्खनन रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। वहीं भंडारा जिले के अधिकारियों ने भी मामले को गंभीर बताते हुए उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई करने की बात कही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नदी क्षेत्र में रात के समय रेत निकासी की गतिविधियां देखी जाती हैं, जिससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और शासन को राजस्व हानि भी हो रही है। ग्रामीणों ने संयुक्त निगरानी दल गठित कर नियमित निरीक्षण की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के राजस्व एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीम द्वारा नदी क्षेत्र का निरीक्षण किया जा सकता है। निरीक्षण के बाद सीमांकन एवं आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि अंतर्राज्यीय नदियों में अवैध उत्खनन रोकने के लिए दोनों राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय और स्पष्ट सीमांकन आवश्यक है। फिलहाल बावनथड़ी नदी को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया जारी है और मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

