Thursday, June 11, 2026
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जहां विपत्ति में सहायता करना सच्चा धर्म है, वहीं करुणा और दया भी हैं मानवता की असली पहचान

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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विकट परिस्थिति में किसी घायल व्यक्ति या मूक पशु-पक्षी को देखकर कभी भी उसकी उपेक्षा ना करें। अपनी अंतरात्मा में करुणा का भाव जगाकर उनकी सहायता के लिए आगे बढ़ें। वास्तव में, किसी भी प्राणी की पीड़ा को केवल देखना ही पर्याप्त नहीं है, उस पीड़ा को सहानुभूतिपूर्वक महसूस करना और उसे कम करने का प्रयास करना ही सच्ची करुणा है क्योंकि दूसरों के प्रति दयाभाव रखने से जिस आत्मिक शांति का अनुभव होता है, वह अनमोल है।
याद रखें, आत्मिक शांति दुनिया के किसी भी बाजार में खरीदी नहीं जा सकती, इसे केवल निस्वार्थ सेवा और प्रेम से ही प्राप्त किया जा सकता है। इंसान के रूप में जन्म लेना सौभाग्य की बात हो सकती है, लेकिन हृदय में दया और करुणा का होना ही आपके ‘इंसान’ होने की असली पहचान है। शेष सब हमारे कर्मों पर निर्भर है । कहावत भी है कि: कर्म करे, किस्मत बने, जीवन का यह मर्म। बंधु! तेरे हाथ में, तेरा अपना कर्म…
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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