मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
“घर के भीतर जी भर के रो लो, लेकिन दरवाजा हमेशा हंसकर ही खोलो” यह कहावत केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन को गरिमा और समझदारी से जीने का एक बड़ा मंत्र है। दुनिया का एक कड़वा नियम यह भी है कि यहाँ लोग आपकी कामयाबी में भले ही शामिल ना हों, लेकिन आपके बिखराव को देखने के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं। लोग आपके आँसुओं को सांत्वना देने के बजाय, घाव पर नमक छिड़कने का कार्य में अपना बड़प्पन समझते हैं। दुनिया आपकी संवेदनशीलता को आपकी कमजोरी मान सकती है । रोने में कोई बुराई नहीं है। रोना मन को हल्का करता है और भीतर के गुबार को बाहर निकालता है, लेकिन इसके लिए सबसे सुरक्षित जगह आपका अपना घर, आपका अपना एकांत है। अपनी चारदीवारी के भीतर अपने सारे दर्द को बह जाने दीजिए।
जब आप घर का दरवाज़ा खोलकर दुनिया के सामने कदम रखते हैं, तो चेहरे पर एक सहज मुस्कान आपका सबसे बड़ा हथियार बन जाती है । मुस्कान का मतलब यह नहीं कि आपके जीवन में सब कुछ ठीक है, बल्कि इसका मतलब यह है कि आप अपने हालातों से लड़ने के लिए अंदर से बेहद मजबूत हैं। हंसकर दरवाज़ा खोलने से आप दुनिया को यह संदेश देते हैं कि आपकी खुशियों की चाबी किसी और के हाथ में नहीं है। यह आपकी आत्म-निर्भरता और आत्मसम्मान को दर्शाता है । इसलिए मन हल्का करने के लिए अपनों के बीच या एकांत में रो लेना बुद्धिमानी है, लेकिन दुनिया के सामने हमेशा अपने मजबूत और मुस्कुराते हुए चेहरे को ही पेश करें। याद रखिए, दुनिया तमाशा देखने में माहिर है, मरहम लगाने में नहीं। अपनी गरिमा को बनाए रखिए, भीतर चाहे जो भी तूफ़ान हो, बाहर हमेशा शांत और मुस्कुराते रहिए।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

