Tuesday, September 29, 2026
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जब समाज में लालच बढ़ता है, तो भ्रष्टाचार, चोरी और धोखेबाजी जैसी बुराइयां लेती हैं जन्म

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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भगवान बुद्ध कहते हैं, ‘मनुष्य के लिए सबसे बड़ा शत्रु उसका लोभ और मोह है।’ लालच व्यक्ति को विवेकहीन बना देता है, जिससे वह नैतिकता, ईमानदारी और करुणा को ताक पर रखकर केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति में लग जाता है। वह यह नहीं देखता कि उसके लालच का असर समाज पर क्या पड़ेगा। रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, अनैतिक व्यापार, अपराध- ये सभी लालच की ही शाखाएं हैं। लालची व्यक्ति क्षणिक सुखों के पीछे भागते-भागते आत्मिक शांति और संतोष से वंचित हो जाता है।
जो व्यक्ति लालच को नियंत्रित नहीं करता, आखिरकार लालच ही उसे नियंत्रित कर लेता है। यह एक ऐसी सुरंग है, जो निरंतर बढ़ती जाती है और अंत में व्यक्ति को निगल जाती है। जब समाज में लालच बढ़ता है, तो भ्रष्टाचार, चोरी और धोखेबाजी जैसी बुराईयां जन्म लेती हैं । महापुरुषों ने भी कहा है कि “सन्तोष परमं सुखम” अर्थात् संतोष ही सबसे बड़ा सुख है। इसलिए सच्चा सुख तृप्ति में है, ना कि अंतहीन इच्छाओं के पीछे भागने में।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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