Thursday, June 11, 2026
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ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं पर तिहरा शोषण झेलती हैंग्रामीण मजदूर वर्ग की महिलाएं सबसे ज्यादा शोषित हैं!


क्योंकि ये महिलाएं पुरुष के साथ बाहर जाकर भी दिनभर खेत पर काम /मजदूरी करती हैं और घर के काम व बच्चे भी अकेली संभालती हैं।
जबकि मजदूर पुरुष सिर्फ बाहर के काम करता है घर में पैर पसार कर आराम करता है या मोहल्ले में गप मारकर टाइम काटता है।
इस दौरान कोई मजदूर आदमी बीवी के साथ मिलकर घर के काम रोटी बनाना, बर्तन साफ करना, झाड़ू पोछा न करता। न बच्चों की टट्टी साफ करता।

वहीं बाहर दिनभर मजदूरी करके आई महिला घर आते ही चूल्हे चौके में घुस जाती है साथ में बच्चों को भी संभालना है।

शाम को टहलते घूमते या आराम करते हुए पुरुष आकर बस औरत के हाथ का खाना ठूंस लेता है, खाने में कोई कमी होने पर ऊपर से औरत से गालीगलौज मारपीट भी करना है।
अधिकतर मजदूर पुरुष दारू भी पीते हैं और पत्नी से मारपीट करते हैं।
रात में इनको थकी-मांदी बीवी से बिस्तर में मनोरंजन भी चाहिए होता है । दिनभर और आधी रात तक थकी औरत रात में कुछ घंटे सुकून की नींद लेना चाहती है लेकिन उसे पति से बलात्कार सहना पड़ता है। आदमी तो आराम से जबरदस्ती कर ऑर्गेज्म लेकर सो जाता है लेकिन औरत को ऑर्गेज्म देना जानता तक नहीं।

यही सिलसिला चलता रहता है इन सबमें पिसती है बस औरत।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, सवर्ण महिलाओं से औसतन 14 साल कम जीती हैं SC,ST,OBC महिलाएं। यानी सवर्ण महिलाओं की तुलना में SC,ST,OBC महिलाओं की मौत 14 साल पहले हो जाती है।
स्वास्थ्य गत समस्याएं और लैंगिक उत्पीड़न सबसे बड़ा कारण है।

SC, St , OBC औरतें दोहरा तिहरा शोषण झेलती हैं, बाहर सवर्ण समाज से, घर में अपने ही पुरुषों से , ऊपर से गरीबी की मार ..

Sc , St,OBC पुरुष चाहें तो कम से कम अपने घर की महिलाओं का जीवन काफी हद तक आसान बना सकते हैं। उन पर दोहरा बोझ न डालकर, बच्चे पैदा न करके। घर और बाहर दोनों साथ मिलकर काम करें, महिला को भी अपनी तरह एक इंसान समझकर।

हरीराम “मानव”
नसीराबाद, अजमेर
94613-76979

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