मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
जीवन की राह में जब भी हमारे सामने बाधाएं आती हैं या हम असफल होते हैं, तो अक्सर हमारा मन दो रास्तों पर मुड़ जाता है, या तो हम अपने भाग्य को दोष देने लगते हैं या फिर ईश्वर से शिकायत करने लगते हैं, लेकिन इतिहास और वर्तमान इस बात के गवाह हैं कि सफलता की चोटी पर वे लोग नहीं पहुंचते जो परिस्थितियों का रोना रोते हैं, बल्कि वे पहुंचते हैं जो अपनी मेहनत से अपना रास्ता खुद बनाते हैं। भाग्य और भगवान का बहाना
अक्सर लोग अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ‘किस्मत’ का सहारा लेते हैं। जब कोई प्रयास विफल होता है, तो उनके लिए यह कहना आसान होता है कि “मेरी किस्मत में यही लिखा था।”
अंततः, सफलता उन लोगों के पास नहीं आती जो हाथ पर हाथ धरकर शुभ समय का इंतज़ार करते हैं। सफलता उनके कदम चूमती है, जो पसीने से अपनी तकदीर लिखते हैं। जो लोग भाग्य को कोसना छोड़कर अपने कर्मों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वे ना केवल अपना जीवन बदलते हैं, बल्कि दुनिया के लिए एक मिसाल बन जाते हैं। याद रखें: आपकी मेहनत ही वह कलम है, जिससे आप अपनी किस्मत का पन्ना फिर से लिख सकते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

